1945 की वेवल योजना (The Wavell Plan) : 

  • 1945 की वेवल योजना (The Wavell Plan),                             क्रिप्स शिष्टमण्डल (Cripps Mission) की असफलता से सभी को निराशा हुईकांग्रेस ने संविधान सभा की माँग के सिवाय ऐसी कोई मांग नहीं की जिससे अंग्रेजों को परेशानी होती। 
  • 1945 की वेवल योजना
  • द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणाम स्वरूप जापान लगभग भारत द्वार पर खड़ा थाइस कठिन परिस्थिति से बचने के लिए कांग्रेस चुप नही रह सकती थी। 
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  •  गांधी जी ने अप्रैल 1942 में अंग्रेजों से “सुव्यवस्थित ढंग से भारत से चले जाने की बात कहीं।” 
  • इसी समय भारत छोडो का नारा प्रसिह हुआ । 
  • अंग्रेजों द्वारा भारत न छोड़ने की स्थिति में महात्मा गांधी के नेतृत्व मे सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाये जाने का प्रस्ताव रखा गया। 
  • गांधी जी और कार्यकारिणी के सदस्‌यों को बंदी बना लिया गयाइसी कारण जगहजगह विद्रोह होने लगा जिससे सैकड़ो व्यक्ति मारे गए और हजारों को जेल में बंद कर दिया गया। 
  • विद्रोह को समाप्त करने हेतु अक्टूबर 1943 में लार्ड लिन निथगो के स्थान पर लाई बेवल को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया। 
  • मार्च 1945 को लाई वेवल विचार विमर्श के लिए इंग्लैण्ड गए |
  • 14 जून 945 को बेवल द्वारा विचार विमर्श के परिणाम के बारे मे रेडियो के माध्यम से जनता को अवगत कराया गया । 
  • जब तक नया संविधान बने तब तक वायसराय की कार्यकारिणी के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा गया। इस कार्यकारिणी में गवर्नर जनरल मुख्य सेनापति के अतिरिक्त सभी सदस्य भारतीय नेताओं में से चुने जाएंगे |
  • परिषद में मुसलमान और सवर्ण हिन्दूओं की संख्या बराबरबराबर होगी |
  • गवर्नर जनरल का निषेधाधिकार (Veto) समाप्त नही किया जाएगा लेकिन उसका प्रयोग करना आवश्यक नही होगा। 
  • विदेशी मामले भारतियों को सौंप दिए जाएंगे लेकिन जनजातीय एवं सीमाई मामले छोडकर क्योंकि यह रक्षा विभाग के का भाग माने जाएंगे | 
  • कार्यकारिणी की नियुक्ति के लिए एक सभा बुलाई जाएगी जिसमे सर्वसम्मति से सूची प्रस्तुत की जा सके । 
  • जिन प्रांतो में मंत्रि परिषद भंग हो गई तथा गवर्नर अपने पार्षदों की सहायता से कार्य कर रहे थेवहो भी मिली मुली सरकारें बनाई जाऐगी। 
  • द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन को, निर्णायक जीत हासिल होती  है, तो भारत के लिए नये संविधान निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। 
  • कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्यों को जेल से रिहा कर दिया गया तथा शिमला सम्मेलन मे शामिल होने का निमंत्रण दिया गया इससे जनता में एक आशा की किरण जाग्रत हुई। 
  • शिमला सम्मेलन 25 जून 1945 को प्रारंभ हुआ और तीन दिन की कार्यवाही के बाद स्थगित कर दिया गया । 
  • 11 जुलाई 1945 को जिन्ना, लार्ड वेवल से मिलें जिसमें उन्होंने मुस्लिम लीग को ही समस्त मुसलमानों का प्रतिनिधि माना जाए और वायसराय की सूची में मुस्लिम लीग के बाहर के  किसी भी मुसलमान को शामिल न किया जाए। 
  • जिन्ना की इस शर्त को वेबल ने अस्वीकार कर दियाऔर शिमला सम्मेलन को असफल घोषित कर समाप्त करने की घोषणा की। 

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