भारत के पर्वतीय दर्रे: राज्यवार सूची एवं भौगोलिक तथ्य (Himalayan Passes of India)

 भारत के पर्वतीय दर्रे (Main Mountain Passes of India)भारत के हिमालयी राज्यों तथा प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में कई प्राकृतिक पर्वतीय दर्रे (Passes) स्थित हैं, जो प्राचीन काल से ही व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं। नीचे भारत के पर्वतीय दर्रे राज्यवार एवं क्षेत्रवार विवरण दिया गया है:-

भारत के पर्वतीय दर्रे

 और पढ़े :-पृथ्वी की आंतरिक संरचना|सियाल(SiAl)|सीमा(SiMa)|निफे(NiFe)|

1. लद्दाख एवं जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के दर्रे :-

आफिल दर्रा (Aghil Pass):-

काराकोरम पर्वतमाला में K2 पर्वत के उत्तर में लगभग 5,000 मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित यह दर्रा लद्दाख क्षेत्र को चीन के शिनजियांग (सिकियांग) प्रांत से जोड़ता है। अत्यधिक बर्फबारी के कारण यह मार्ग शीतकाल में (नवंबर से मई के शुरुआती सप्ताह तक) आवागमन के लिए पूरी तरह बंद रहता है।

बनिहाल दर्रा (Banihal Pass / Jawahar Tunnel):-                                     

समुद्र तल से 2,835 मीटर की ऊंचाई पर पीरपंजाल श्रेणी में स्थित बनिहाल दर्रा जम्मू को श्रीनगर से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। सर्दियों में बर्फबारी के बावजूद साल भर निर्बाध यातायात सुनिश्चित करने के लिए यहाँ ‘जवाहर टनल’ का निर्माण किया गया, जिसका उद्घाटन दिसंबर 1956 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर हुआ था।

बुर्जिल दर्रा (Burzil Pass):-

5,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित यह ऐतिहासिक दर्रा कश्मीर घाटी को लद्दाख के देवसाई मैदानों से जोड़ता है। अत्यधिक बर्फीले मौसम के कारण शीत ऋतु में यहाँ व्यापारिक गतिविधियां एवं परिवहन ठप हो जाता है।

चांग ला (Chang La):- 

महान हिमालय में 5,270 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा लद्दाख को तिब्बत से संपर्क प्रदान करता है। इस दर्रे के बाद की सड़क काफी तीखी ढलान वाली है, जो तिब्बती कस्बे चांगत्से (Tangtse) तक जाती है। इस दर्रे का नामकरण स्थानीय ‘चांग-ला बाबा’ मंदिर के नाम पर हुआ है। सर्दियों में यह मार्ग बर्फ से ढका रहता है

इमिस ला (Imis La):-

4,500 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित यह पर्वतीय दर्रा लद्दाख से तिब्बत (चीन) के बीच अपेक्षाकृत एक सुगम संपर्क मार्ग उपलब्ध कराता है। हालांकि, इसकी कठिन भौगोलिक स्थिति और तीव्र ढलान के कारण सर्दियों में बर्फ जम जाने से यह बंद हो जाता है।

खारदुंग ला (Khardung La):-

 समुद्र तल से 6,000 मीटर से भी अधिक की ऊंचाई पर अवस्थित खारदुंग ला भारत का सबसे ऊंचा मोटर वाहन संचालन योग्य (Motorable) पर्वतीय दर्रा है।

खुंजेराब दर्रा (Khunjerab Pass):-

5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह पारंपरिक दर्रा लद्दाख को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ता है। यह नवंबर से मई के दौरान भारी बर्फबारी के कारण बंद रहता है

लनक ला (Lanak La):-

अक्साई-चिन (लद्दाख) क्षेत्र में लगभग 5,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा लद्दाख और ल्हासा (तिब्बत) को जोड़ता है। चीन ने यहाँ एक सामरिक सड़क बनाई है जो शिनजियांग को तिब्बत से जोड़ती है।

जोजीला (Zoji La):-

समुद्र तल से लगभग 3,850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित जोजीला दर्रा श्रीनगर को कारगिल एवं लेह से जोड़ता है। इसे केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-1D) घोषित किया गया है। सर्दियों (दिसंबर से मध्य मई) में बर्फबारी से मार्ग बंद हो जाता है, जिसे खुला रखने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की ‘बीकॉन फोर्स’ (Beacon Force) निरंतर प्रयासरत रहती है।

पेंजी ला (Pensi La):-

 जोजिला दर्रे के पूर्व में 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा कश्मीर घाटी को कारगिल (लद्दाख) से जोड़ता है। नवंबर से मध्य मई तक बर्फ से ढके रहने के कारण यहाँ आवागमन बंद  रहता है।

पीर-पंजाल दर्रा (Pir Panjal Pass):-

 ऐतिहासिक मुगल रोड पर स्थित यह दर्रा जम्मू को श्रीनगर से जोड़ने का सबसे सरल और पक्का मार्ग रहा है। विभाजन के बाद इसे बंद कर दिया गया था, किंतु यह जम्मू एवं कश्मीर घाटी के मध्य एक बेहद सुगम मार्ग है।

कारा ताघ दर्रा (Kara Tagh Pass):-

 6,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर काराकोरम श्रेणी में अवस्थित यह दर्रा प्राचीन रेशम मार्ग (Silk Route) की एक महत्वपूर्ण उप-शाखा था। सर्दियों में यह क्षेत्र पूरी तरह बर्फ से ढका रहता है।

थांगला (Thang La):-

 समुद्र तल से 5,359 मीटर की ऊंचाई पर लद्दाख में स्थित यह दर्रा खारदुंग ला के बाद भारत में वाहनों की आवाजाही योग्य दूसरा सबसे ऊंचा पर्वतीय दर्रा है।

2. हिमाचल प्रदेश क्षेत्र के दर्रे :-

बारा लाचा (Bara-lacha La):-

 4,843 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा मनाली को लेह से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवस्थित है। नवंबर से मध्य मई तक बर्फबारी के कारण यह मार्ग पूरी तरह बंद रहता है।

देब्सा दर्रा (Debsa Pass):-

 हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और स्पीति जिलों के बीच 5,270 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा पारंपरिक पिन-पार्वती मार्ग की तुलना में एक सुगम और कम दूरी करता है।

रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass):-

3,979 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा कुल्लू घाटी को लाहुल एवं स्पीति घाटियों से जोड़ता है। सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा मार्ग तैयार किया गया है। अत्यधिक पर्यटको एवं माल ढ़ोने वाले वाहनों के कारण यहाँ जाम एक आम समस्या है।

शीपकीला (Shipki La):-

 4,300 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा सतलज महाखड्ड (Gorge) के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को तिब्बत से जोड़ता है। तिब्बत से निकलने वाली सतलज नदी इसी दर्रे से भारत में प्रवेश करती है। यह नाथू ला और लिपुलेख के बाद भारत-चीन व्यापार का तीसरा बड़ा मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग 22) है।

3. उत्तराखंड क्षेत्र के दर्रे :-

लिपु लेख (Lipulekh Pass):-

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित यह दर्रा भारत को तिब्बत से जोड़ता है तथा मानसरोवर यात्रियों के लिए प्रमुख रास्ता है। यह भारत-चीन व्यापार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानसून में भूस्खलन और शीतकाल में हिमस्खलन (Avalanche) यहाँ की मुख्य बाधाएं हैं।

माना दर्रा (Mana Pass):-

 5,611 मीटर की ऊंचाई पर महान हिमालय में स्थित माना दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है। अत्यधिक सर्दी के कारण यह वर्ष में लगभग 6 महीने बर्फ से ढका रहता है।

मंगशा धुरा दर्रा (Mangsha Dhura Pass):-

 लगभग 5,000 मीटर की ऊंचाई पर पिथौरागढ़ में स्थित यह दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत से संबद्ध करता है। यह कैलाश-मानसरोवर यात्रा का प्रसिद्ध मार्ग भी है, जहाँ भूस्खलन की समस्या बनी रहती है।

मुलिंग ला (Muling La):-

 गंगोत्री के उत्तर में स्थित यह एक मौसमी (Seasonal) दर्रा है जो उत्तराखंड को तिब्बत से जोड़ता है। सर्दियों में बर्फ जम जाने के कारण यह रास्ता कठिन हो जाता है।

नीति दर्रा (Niti Pass):-

 5,068 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नीति दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत सीमा से जोड़ता है। बर्फबारी के चलते यह दर्रा नवंबर से मध्य-मई तक यातायात के लिए पूरी तरह बंद रहता है।

ट्रेल्स दर्रा (Trail’s Pass):-

 उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों की सीमा पर 5,212 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा पिंडारी ग्लेशियर के कगार पर अवस्थित है। यह पिंडारी घाटी को मिलाम घाटी से जोड़ता है। खड़ी चट्टानों और उबड़-खाबड़ धरातल के कारण इसे पार करना अत्यंत कठिन माना जाता है।

4. पूर्वोत्तर भारत के दर्रे (सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेश):

नाथू ला (Nathu La):-

सिक्किम में 4,310 मीटर की ऊंचाई पर भारत-चीन सीमा पर स्थित यह दर्रा ऐतिहासिक ‘रेशम मार्ग’ (Silk Route) की एक मुख्य शाखा रहा है। भारत-चीन व्यापार के तीन सीमा मार्गों में यह प्रमुख है। 1962 के युद्ध के बाद बंद इस दर्रे को वर्ष 2006 में पुनः व्यापार हेतु खोला गया था।

जेलेप ला (Jelep La):-

 सिक्किम में 4,538 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा प्रसिद्ध चुंबी घाटी से गुजरते हुए सिक्किम को तिब्बत की राजधानी ल्हासा से जोड़ता है।

बोमडी ला (Bomdi La):-

 अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी भाग में महान हिमालय पर 2,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा  अरुणाचल प्रदेश को ल्हासा (तिब्बत) से जोड़ता है। शीतकाल में भीषण ठंड और बर्फबारी के कारण यहाँ यातायात बंद रहता है।

दिहांग दर्रा (Dihang Pass):-

1,220 मीटर की ऊंचाई पर अरुणाचल प्रदेश में अवस्थित यह दर्रा भारत को म्यांमार के मंडाले शहर से जोड़ता है।

डिफू दर्रा (Diphu Pass):-

 अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित यह दर्रा म्यांमार के मंडाले तक एक छोटा व सुगम रास्ता प्रदान करता है। यह एक पारंपरिक दर्रा है जो भारत और म्यांमार के बीच वर्ष भर व्यापार एवं यातायात के लिए खुला रहता है।

लिखापानी दर्रा (Likhapani Pass):-

4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा अरुणाचल प्रदेश को म्यांमार से जोड़ता है। यह पूरे वर्ष व्यापारिक गतिविधियों और यातायात के लिए चालू रहता है।

पांगसान दर्रा (Pangsau Pass):-

 4,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित पांगसान दर्रा अरुणाचल प्रदेश को म्यांमार के मंडाले क्षेत्र से कनेक्टिविटी प्रदान करता है।

 5. प्रायद्वीपीय भारत के दर्रे:-

शेनकोटाह दर्रा (Shencottah Gap):-

 पश्चिमी घाट श्रेणी में अवस्थित यह दर्रा तमिलनाडु के मदुराई शहर को केरल के कोट्टायम नगर से जोड़ता है। इस दर्रे के समीप इसी नाम (शेनकोटाह) का एक छोटा कस्बा भी स्थित है।

और विस्तृत पढ़े :-survey of india

हिमालय के प्रमुख दर्रे – वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) :-

1- आफिल दर्रा किस पर्वत श्रेणी में स्थित है?

(A) पीर पंजाल (B) काराकोरम  (C) शिवालिक (D) धौलाधार

2- बनिहाल दर्रा किसे जोड़ता है?

(A) लेह–कारगिल (B) श्रीनगर–कारगिल (C) जम्मू–श्रीनगर  (D) मनाली–लेह

3- जवाहर टनल किस दर्रे पर स्थित है?

(A) रोहतांग (B) बनिहाल  (C) नाथू ला (D) जोजिला

4- बारा लाचा दर्रा किस राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है?

(A) श्रीनगर–लेह (B) मनाली–लेह  (C) जम्मू–पठानकोट (D) शिमला–किन्नौर

5- बोमडी ला दर्रा किस राज्य में स्थित है?

(A) सिक्किम (B) हिमाचल प्रदेश (C) अरुणाचल प्रदेश  (D) उत्तराखंड

6- बुर्जिल दर्रा कश्मीर घाटी को किससे जोड़ता है?

(A) तिब्बत (B) देवसाई मैदानों से  (C) नेपाल (D) भूटान

7- चांग ला दर्रा किसे जोड़ता है?

(A) लद्दाख–तिब्बत  (B) सिक्किम–तिब्बत (C) उत्तराखंड–तिब्बत (D) हिमाचल–तिब्बत

8- देब्सा दर्रा किन जिलों के बीच स्थित है?

(A) कुल्लू–स्पीति  (B) कुल्लू–किन्नौर (C) मंडी–कुल्लू (D) लाहौल–किन्नौर

9- दिहांग दर्रा अरुणाचल प्रदेश को किस देश से जोड़ता है?

(A) चीन (B) नेपाल (C) म्यांमार  (D) भूटान

10- डिफू दर्रा किस दो देशों के बीच पारंपरिक व्यापारिक मार्ग है?

(A) भारत–नेपाल (B) भारत–भूटान (C) भारत–म्यांमार  (D) भारत–चीन

11- इमिस ला दर्रा किसे जोड़ता है?

(A) लद्दाख–तिब्बत  (B) सिक्किम–तिब्बत (C) उत्तराखंड–नेपाल (D) कश्मीर–लद्दाख

12- भारत का मोटर वाहन चलने योग्य सबसे ऊँचा दर्रा कौन-सा है?

(A) थांगला (B) रोहतांग (C) खारदुंग ला  (D) नाथू ला

13- खुंजेराब दर्रा किस पर्वत श्रेणी में स्थित है?

(A) हिमाद्रि (B) काराकोरम  (C) शिवालिक (D) पीर पंजाल

14- जेलेप ला किस राज्य को ल्हासा से जोड़ता है?

(A) अरुणाचल प्रदेश (B) उत्तराखंड (C) सिक्किम  (D) हिमाचल प्रदेश

15- लनक ला कहाँ स्थित है?

(A) सिक्किम (B) अक्साई चिन (लद्दाख)  (C) अरुणाचल प्रदेश (D) हिमाचल प्रदेश

16- लिखापानी दर्रा किस राज्य में स्थित है?

(A) उत्तराखंड (B) अरुणाचल प्रदेश  (C) सिक्किम (D) जम्मू-कश्मीर

17- जोजिला दर्रा किसे जोड़ता है?

(A) श्रीनगर–कारगिल–लेह  (B) जम्मू–श्रीनगर (C) मनाली–लेह (D) कुल्लू–स्पीति

18- लिपुलेख दर्रा किस जिले में स्थित है?

(A) चमोली (B) पिथौरागढ़  (C) उत्तरकाशी (D) रुद्रप्रयाग

19- मानसरोवर यात्रा के लिए प्रसिद्ध दर्रा कौन-सा है?

(A) लिपुलेख  (B) रोहतांग (C) नाथू ला (D) बनिहाल

20- माना दर्रा किस राज्य को तिब्बत से जोड़ता है?

(A) सिक्किम (B) उत्तराखंड  (C) हिमाचल प्रदेश (D) अरुणाचल प्रदेश

21- मंगशा धुरा दर्रा किस जिले में स्थित है?

(A) उत्तरकाशी (B) पिथौरागढ़  (C) चमोली (D) अल्मोड़ा

22- मुलिंग ला किस राज्य में स्थित है?

(A) हिमाचल प्रदेश (B) उत्तराखंड  (C) सिक्किम (D) अरुणाचल प्रदेश

23- नाथू ला किस प्राचीन व्यापार मार्ग की शाखा है?

(A) ग्रैंड ट्रंक रोड (B) सिल्क रूट  (C) दक्षिण पथ (D) उत्तरापथ

24- भारत-चीन युद्ध के बाद नाथू ला पुनः कब खोला गया?

(A) 1998 (B) 2006  (C) 2010 (D) 2014

25- नीति दर्रा किस राज्य में स्थित है?

(A) उत्तराखंड  (B) हिमाचल प्रदेश (C) सिक्किम (D) जम्मू-कश्मीर

26- पांगसान दर्रा किस राज्य में स्थित है?

(A) सिक्किम (B) अरुणाचल प्रदेश  (C) हिमाचल प्रदेश (D) उत्तराखंड

27- पेंजी ला किसे जोड़ता है?

(A) कश्मीर घाटी–कारगिल  (B) श्रीनगर–जम्मू (C) मनाली–लेह (D) लेह–तिब्बत

28- पीर-पंजाल दर्रा किस ऐतिहासिक मार्ग पर स्थित है?

(A) सिल्क रूट (B) मुगल रोड  (C) जी.टी. रोड (D) कालींगा मार्ग

29- कारा ताघ दर्रा किस प्राचीन मार्ग की शाखा था?

(A) सिल्क रूट  (B) मुगल रोड (C) उत्तरापथ (D) दक्षिणापथ

30- रोहतांग दर्रा किन घाटियों को जोड़ता है?

(A) कुल्लू–लाहौल–स्पीति  (B) श्रीनगर–कारगिल (C) किन्नौर–स्पीति (D) गढ़वाल–कुमाऊँ

31- शेनकोटाह दर्रा किन राज्यों को जोड़ता है?

(A) कर्नाटक–केरल (B) तमिलनाडु–केरल  (C) तमिलनाडु–कर्नाटक (D) केरल–गोवा

32- शीपकीला दर्रा किस नदी के भारत में प्रवेश से संबंधित है?

(A) गंगा (B) यमुना (C) सतलज  (D) ब्रह्मपुत्र

33- भारत-चीन व्यापार के लिए तीसरा महत्वपूर्ण दर्रा कौन-सा है?

(A) माना (B) शीपकीला  (C) रोहतांग (D) बनिहाल

34- थांगला किस राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में स्थित है?

(A) हिमाचल प्रदेश (B) लद्दाख  (C) सिक्किम (D) उत्तराखंड

35- ट्रेल्स दर्रा किन घाटियों को जोड़ता है?

(A) पिंडारी घाटी–मिलाम घाटी  (B) कश्मीर–लद्दाख (C) कुल्लू–स्पीति (D) गंगोत्री–यमुनोत्री

विश्व के अधीनस्थ क्षेत्र (Dependent Territories of the World) | सम्पूर्ण जानकारी | Geography Notes

विश्व के अधीनस्थ क्षेत्र (Dependent Territories of the World): विश्व के अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जो भौगोलिक रूप से किसी महाद्वीप या द्वीप पर स्थित हैं, लेकिन राजनीतिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से किसी अन्य देश के अधीन हैं। इन्हें अधीनस्थ क्षेत्र (Dependent Territories) या ओवरसीज़ टेरिटरी (Overseas Territory) कहा जाता है। इन क्षेत्रों का अपना सीमित स्वशासन हो सकता है, परंतु रक्षा, विदेश नीति एवं कुछ प्रशासनिक अधिकार मूल देश के पास रहते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, UPPCS, BPSC, SSC, CDS, NDA, राज्य लोक सेवा आयोग तथा अन्य सामान्य ज्ञान परीक्षाओं में विश्व के अधीनस्थ क्षेत्रों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इस लेख में विश्व के प्रमुख अधीनस्थ क्षेत्रों का विस्तृत एवं सरल विवरण दिया गया है।

विश्व के अधीनस्थ क्षेत्र

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नॉर्वे के अधीनस्थ क्षेत्र :-

1. बोवेट द्वीप (Bouvet Island) :-

  • – दक्षिणी अटलांटिक महासागर में स्थित निर्जन द्वीप।
    – वर्ष 1930 में नॉर्वे के अधीन आया।
    – विश्व के सबसे दूरस्थ एवं निर्जन द्वीपों में गिना जाता है।

2. पीटर प्रथम द्वीप (Peter I Island) :-

  • – अंटार्कटिका में स्थित निर्जन द्वीप।
    1933 में नॉर्वे के अधिकार में आया।

3. क्वीनमॉड लैंड (Queen Maud Land) :-

  • – अंटार्कटिका का एक विशाल क्षेत्र।
    1939 में नॉर्वे ने इस पर अपना दावा स्थापित किया।

ब्रिटेन (United Kingdom) के अधीनस्थ क्षेत्र :-

पिटकेयर्न द्वीप समूह:-

  • ताहिती से लगभग 1920 किमी दक्षिण में स्थित।
    – इसमें पिटकेयर्न, हैण्डरसन, ड्यूसी तथा ओइनो द्वीप शामिल हैं।
    1898 से ब्रिटेन के अधीन।

ब्रिटिश वर्जिन द्वीप :-

  • – खोज 1493 में क्रिस्टोफर कोलंबस द्वारा।
    – 1956 में ब्रिटिश अधीनस्थ क्षेत्र बना।
    – पर्यटन यहाँ की प्रमुख आय का स्रोत है।

कैरमैन द्वीप :-

  • – क्यूबा एवं जमैका के बीच स्थित।
    – 1959 में स्वशासन मिला।
    – 1982 से पृथक ब्रिटिश अधीनस्थ क्षेत्र।
    – अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, पर्यटन एवं मत्स्य उद्योग के लिए प्रसिद्ध।

मांटेसेराट :-

  • – कैरेबियन सागर के लीवार्ड द्वीपों में स्थित।
    – 1960 से ब्रिटिश अधीनस्थ क्षेत्र।
    – इसे पहले एमराल्ड आइलैंड कहा जाता था।

फॉकलैंड द्वीप :-

  • – दक्षिणी अटलांटिक महासागर में स्थित।
    – 1833 से ब्रिटेन के नियंत्रण में।
    – अर्जेंटीना एवं ब्रिटेन के बीच फॉकलैंड युद्ध के कारण प्रसिद्ध।

सेंट हेलेना :-

  • – दक्षिण अटलांटिक महासागर का पर्वतीय द्वीप।
    नेपोलियन बोनापार्ट को वाटरलू युद्ध के बाद यहीं निर्वासित किया गया था।
    – 1821 में उनकी मृत्यु यहीं हुई।

ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी :-

  • – हिंद महासागर में मॉरीशस के उत्तर-पश्चिम में स्थित।
    – 1965 से ब्रिटिश अधीन।
    – सबसे बड़ा द्वीप दियागो गार्सिया है, जहाँ अमेरिका का महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा स्थित है।

टर्क्स एवं कैकोस द्वीप :-

  • – कैरेबियन क्षेत्र में स्थित।
    – अधिकांश जनसंख्या अफ्रीकी मूल की है।

ब्रिटिश अंटार्कटिक क्षेत्र :-

  • – दक्षिण ओर्कनी तथा साउथ शेटलैंड द्वीप समूह शामिल हैं।

न्यूजीलैंड के अधीनस्थ क्षेत्र :-

कुक आइलैंड :-

  • – दक्षिण-पूर्वी प्रशांत महासागर में स्थित।
    – 1773 में जेम्स कुक ने खोजा।
    – 1901 में न्यूजीलैंड के अधीन आया।

निउ :-

  • – 1774 में जेम्स कुक द्वारा खोज।
    – 1974 में न्यूजीलैंड से संबद्ध स्वशासी क्षेत्र बना।

रॉस डिपेंडेंसी :-

  • – अंटार्कटिका का क्षेत्र।
    – 1923 से न्यूजीलैंड के अधीन।
    – यहाँ वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र स्थित हैं।

तोकेलाओ :-

  • – पश्चिमी समोआ के उत्तर में स्थित तीन द्वीप।
    – 1925 में न्यूजीलैंड में शामिल।
    – यहाँ मुख्यतः पोलिनेशियन जनजाति निवास करती है।

स्पेन के अधीनस्थ क्षेत्र :-

कैनारी द्वीप समूह :-

  • – अफ्रीका के उत्तर-पश्चिम में स्थित ज्वालामुखीय द्वीप।
    – 1479 से स्पेन के अधीन।
  •   दो प्रमुख प्रशासनिक भाग :-
    – सांताक्रूज़ डी टेनेरीफ
    – लास पालमास

सेउटा (Ceuta) :-

  • जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के दक्षिण में।
    – मोरक्को की सीमा के भीतर स्थित स्पेन का स्वायत्त शहर।
    – कर-मुक्त बंदरगाह के रूप में प्रसिद्ध।

मेलिला :-

  • – उत्तर अफ्रीका में मोरक्को के भीतर स्थित स्पेन का स्वायत्त क्षेत्र।
    – प्रमुख आय स्रोत—बंदरगाह एवं मत्स्य उद्योग।

डेनमार्क के अधीनस्थ क्षेत्र :-

ग्रीनलैंड :-

  • विश्व का सबसे बड़ा द्वीप।
    – 1721 से डेनमार्क के अधीन।
    – 1979 में स्वशासन तथा 2009 में व्यापक स्वायत्तता प्राप्त।
    – अधिकांश भाग आर्कटिक वृत्त में स्थित।
    – प्रमुख उद्योग—मत्स्य पालन एवं खाद्य प्रसंस्करण।

फेरो द्वीप समूह :-

  • – उत्तरी अटलांटिक महासागर में।
    – 1948 से स्वशासन प्राप्त।
    – डेनमार्क के अधीन स्वायत्त क्षेत्र।

अमेरिका (United States) के अधीनस्थ क्षेत्र :-

अमेरिकन समोआ :-

  • – दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में।
    – 1900 से अमेरिका के अधीन।

प्यूर्टो रिको :-

  • – कैरेबियन क्षेत्र का प्रमुख द्वीप।
    – अमेरिका का असंगठित क्षेत्र।
    – पर्यटन एवं उद्योग के लिए प्रसिद्ध।

अमेरिकी वर्जिन द्वीप :-

  • – 1917 में अमेरिका ने डेनमार्क से खरीदा।
    – कैरेबियन सागर में स्थित।

गुआम :-

  • – पश्चिमी प्रशांत महासागर में।
    – अमेरिका का महत्वपूर्ण नौसैनिक एवं वायुसेना अड्डा।

मिडवे द्वीप :-

  • – प्रशांत महासागर का प्रवाल द्वीप।
    द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण।

वेक द्वीप :-

  • – 1899 से अमेरिका के अधीन।
    – सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण।

उत्तरी मेरियाना द्वीप समूह :-

  • – 1975 से अमेरिका के साथ राष्ट्रमंडल (Commonwealth) का दर्जा।
    – राजधानी—साइपन।
    – द्वितीय विश्व युद्ध में टिनियन द्वीप से हिरोशिमा एवं नागासाकी पर बम ले जाने वाले बी-29 विमान उड़ान भरे थे।

पुर्तगाल एवं नीदरलैंड से संबंधित क्षेत्र :-

अजोर्स :-

  • – अटलांटिक महासागर में स्थित ज्वालामुखीय द्वीप समूह।
    – पुर्तगाल का स्वायत्त क्षेत्र।

मेडेरा द्वीप समूह :-

  • – अफ्रीका के पश्चिम में स्थित।
    – पर्यटन एवं कृषि के लिए प्रसिद्ध।

अरूबा :-

  • – कैरेबियन क्षेत्र का स्वायत्त द्वीप।
    – वर्तमान में नीदरलैंड साम्राज्य का स्वायत्त देश।

फ्रांस के अधीनस्थ क्षेत्र :-

ग्वाडेलूप :-

  • – कैरेबियन क्षेत्र में स्थित।
    – फ्रांस का विदेशी विभाग।

फ्रेंच पोलिनेशिया :-

  • – लगभग 130 द्वीपों का समूह।
    – दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित।
    – राजधानी—पापीते।

मार्टिनिक :-

  • – कैरेबियन सागर में।
    – फ्रांस का विदेशी विभाग।

फ्रेंच गुयाना :-

  • – दक्षिण अमेरिका में ब्राजील एवं सूरीनाम के बीच।
    – यूरोपीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रमुख प्रक्षेपण केंद्र (कुरू स्पेस सेंटर) यहीं स्थित है।

रियूनियन :-

  • – हिंद महासागर में मेडागास्कर के पूर्व।
    – फ्रांस का विदेशी विभाग।

मायोट :-

  • – मेडागास्कर के उत्तर-पश्चिम में।
    – फ्रांस का विदेशी विभाग।

न्यू कैलेडोनिया :-

  • – ऑस्ट्रेलिया के पूर्व।
    – विश्व के सबसे बड़े निकेल भंडारों में से एक।
    – निकेल खनन यहाँ का प्रमुख उद्योग है।

वॉलिस एवं फुटुना :-

  • – दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप समूह।
    – अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के समीप।

सेंट पियरे एवं मिकेलॉन :-

  • – कनाडा के पूर्वी तट के समीप।
    – उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित फ्रांसीसी क्षेत्र।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य :-

  • विश्व का सबसे बड़ा द्वीप ग्रीनलैंड है।
    दियागो गार्सिया ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी का सबसे बड़ा द्वीप है।
    नेपोलियन बोनापार्ट का निर्वासन सेंट हेलेना में हुआ था।
    फॉकलैंड द्वीप को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच युद्ध हुआ।
    – न्यू कैलेडोनिया निकेल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
    फ्रेंच गुयाना यूरोप के प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र के कारण महत्वपूर्ण है।
    गुआम अमेरिका का प्रमुख सैन्य अड्डा है।
    कैनारी द्वीप ज्वालामुखीय उत्पत्ति के द्वीप हैं।
    रॉस डिपेंडेंसी अंटार्कटिका में न्यूजीलैंड का दावा क्षेत्र है।
    – बोवेट द्वीप विश्व के सबसे निर्जन द्वीपों में से एक माना जाता है।

विस्तृत पढ़े :-

निष्कर्ष :-

विश्व के अधीनस्थ क्षेत्र राजनीतिक भूगोल का महत्वपूर्ण विषय हैं। इन क्षेत्रों का सामरिक, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इनके स्थान, नियंत्रण करने वाले देश तथा विशेषताओं से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। यदि आप UPSC, UPPCS, BPSC, SSC, CDS, NDA या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो इन सभी अधीनस्थ क्षेत्रों का अध्ययन अवश्य करें।

 

वायुमंडल की संरचना (Structure of Atmosphere): पृथ्वी की विभिन्न परतें, विशेषताएँ एवं महत्वपूर्ण तथ्य

 

वायुमंडल की संरचना (Structure of Atmosphere): पृथ्वी की विभिन्न परतें, विशेषताएँ एवं महत्वपूर्ण तथ्य :-

पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व वायुमंडल के कारण ही संभव है। वायुमंडल हमें साँस लेने के लिए ऑक्सीजन प्रदान करता है, सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से रक्षा करता है तथा पृथ्वी के तापमान को संतुलित बनाए रखता है। भूगोल तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से वायुमंडल की संरचना एवं उसकी विभिन्न परतें एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस लेख में हम वायुमंडल की संरचना, उसकी पाँच प्रमुख परतों, उनकी विशेषताओं तथा उनसे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सरल भाषा में समझेंगे।

वायुमंडल क्या है?

“वायुमंडल (Atmosphere) पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए गैसों का विशाल आवरण है।” इसका विस्तार लगभग 10,000 किलोमीटर तक माना जाता है, लेकिन इसका लगभग 99 प्रतिशत भार केवल 32 किलोमीटर की ऊँचाई तक ही सीमित रहता है। गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वायुमंडल पृथ्वी से जुड़ा रहता है। ऊँचाई बढ़ने पर वायु का घनत्व और वायुदाब लगातार कम होते जाते हैं।

वायुमंडल की संरचना

इसे भी पढ़े :-पृथ्वी की आंतरिक संरचना|सियाल(SiAl)|सीमा(SiMa)|निफे(NiFe)|

वायुमंडल की प्रमुख परतें :-

वैज्ञानिकों ने वायुमंडल को मुख्य रूप से पाँच परतों में विभाजित किया है—

  • 1. क्षोभमंडल (Troposphere)
  • 2. समतापमंडल (Stratosphere)
  • 3. मध्यमंडल (Mesosphere)
  • 4. आयनमंडल (Ionosphere)
  • 5. बाह्यमंडल (Exosphere)

अब प्रत्येक परत को विस्तार से समझते हैं।

1. क्षोभमंडल (Troposphere) :-

क्षोभमंडल वायुमंडल की सबसे निचली तथा सबसे महत्वपूर्ण परत है। पृथ्वी पर होने वाली लगभग सभी मौसमी गतिविधियाँ इसी परत में होती हैं।

ऊँचाई :-                                                                                                       

  •  ध्रुवों पर लगभग 8 किलोमीटर
  • विषुवत रेखा पर लगभग 18 किलोमीटर

प्रमुख विशेषताएँ :-

  • वायुमंडल का अधिकांश भार इसी परत में पाया जाता है।
  • बादल, वर्षा, आँधी, तूफान, कोहरा तथा हिमपात जैसी सभी मौसमी घटनाएँ इसी परत में होती हैं।
  • ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता जाता है।
  • औसतन प्रत्येक 1 किलोमीटर की ऊँचाई पर तापमान लगभग 6.5°C कम हो जाता है। इसे सामान्य ताप पतन दर (Normal Lapse Rate) कहा जाता है।
  • लगभग प्रत्येक 165 मीटर की ऊँचाई पर तापमान में 1°C की कमी आती है।

क्षोभसीमा (Tropopause) :-

क्षोभमंडल और समतापमंडल के बीच की सीमा को क्षोभसीमा कहते हैं। इसी क्षेत्र के निकट अत्यधिक तीव्र गति से बहने वाली पवनों को जेट पवन (Jet Streams) कहा जाता है। ये पवनें मौसम तथा विमानन दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं।

2. समतापमंडल (Stratosphere) :-

क्षोभमंडल के ऊपर स्थित परत को समतापमंडल कहा जाता है। यह अपेक्षाकृत शांत एवं स्थिर परत है।

प्रमुख विशेषताएँ :-

  • प्रारम्भिक भाग में तापमान लगभग स्थिर रहता है।
  • लगभग 20 किलोमीटर की ऊँचाई के बाद तापमान बढ़ने लगता है।
  • तापमान बढ़ने का मुख्य कारण ओजोन परत है।
  • ओजोन सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (Ultraviolet) किरणों को अवशोषित कर लेती है, जिससे तापमान बढ़ जाता है।
  • इस परत में मौसम संबंधी हलचल बहुत कम होती है।
  • विमान उड़ाने के लिए उपयुक्त
  • समतापमंडल में वायु अपेक्षाकृत स्थिर रहती है। इसलिए लंबी दूरी के कई वाणिज्यिक विमान इसी परत में उड़ान भरना पसंद करते हैं।

3. मध्यमंडल (Mesosphere) :-

समतापमंडल के ऊपर स्थित परत को मध्यमंडल कहा जाता है।

ऊँचाई- लगभग 50 से 80 किलोमीटर तक।

प्रमुख विशेषताएँ :-

  • इस परत में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान तेजी से घटता है।
  • इसकी ऊपरी सीमा पर तापमान लगभग –100°C तक पहुँच जाता है।
  • यह वायुमंडल का सबसे ठंडा भाग माना जाता है।
  • पृथ्वी की ओर आने वाले अधिकांश छोटे उल्कापिंड इसी परत में घर्षण के कारण जलकर नष्ट हो जाते हैं।

4. आयनमंडल (Ionosphere) :-

मध्यमंडल के ऊपर स्थित आयनमंडल लगभग 80 से 640 किलोमीटर तक फैला होता है।

प्रमुख विशेषताएँ :-

  • इस परत में विद्युत आवेशित कणों (आयन) की अधिकता होती है।
  • ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान बढ़ता जाता है।
  • रेडियो संचार के लिए यह परत अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • विभिन्न आवृत्तियों की रेडियो तरंगें इसी परत से परावर्तित होकर दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुँचती हैं।

आयनमंडल को कई उप-परतों में बाँटा गया है :-

D परत (D Layer) :-

  • निम्न आवृत्ति तथा दीर्घ तरंगदैर्ध्य वाली रेडियो तरंगों के परावर्तन में सहायक होती है।

E परत (E Layer) :-

  • इसे केनेली-हीविसाइड (Kennelly-Heaviside) परत भी कहा जाता है।
  • मध्यम तथा उच्च आवृत्ति की रेडियो तरंगों के परावर्तन में सहायता करती है।
  • ध्रुवीय क्षेत्रों में दिखाई देने वाले ध्रुवीय प्रकाश (Aurora) से इसका संबंध माना जाता है।

ध्रुवीय प्रकाश दो प्रकार के होते हैं—

  • Aurora Borealis (उत्तरी ध्रुवीय प्रकाश)
  • Aurora Australis (दक्षिणी ध्रुवीय प्रकाश)

F परत (F Layer) :-

  • इसे एपलटन (Appleton) परत भी कहा जाता है।
  • मध्यम एवं उच्च आवृत्ति वाली रेडियो तरंगों के परावर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • लंबी दूरी के रेडियो संचार में इसका विशेष महत्व है।

G परत (G Layer):-

  • यह निम्न, मध्यम तथा उच्च सभी प्रकार की रेडियो तरंगों के परावर्तन में सहायक मानी जाती है।

5. बाह्यमंडल (Exosphere):-

  • यह वायुमंडल की सबसे बाहरी परत है।
  • ऊँचाई लगभग 640 से 1,000 किलोमीटर तक।

प्रमुख विशेषताएँ :-

  • यहाँ वायु अत्यंत विरल होती है।
  • विद्युत आवेशित कणों की प्रधानता बनी रहती है।
  • इस परत में क्रमशः नाइट्रोजन (N₂), ऑक्सीजन (O₂), हीलियम (He) तथा हाइड्रोजन (H₂) की अलग-अलग परतें पाई जाती हैं।
  • लगभग 1,000 किलोमीटर के बाद वायुमंडल अत्यंत विरल हो जाता है।
  • लगभग 10,000 किलोमीटर की ऊँचाई पर वायुमंडल धीरे-धीरे अंतरिक्ष में विलीन हो जाता है।

वायुमंडल का महत्व :-

  • वायुमंडल पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
  • जीवों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना।
  • सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से रक्षा करना।
  • पृथ्वी का तापमान संतुलित रखना।
  • जल चक्र को संचालित करना।
  • मौसम और जलवायु का निर्माण करना।
  • रेडियो संचार को संभव बनाना।
  • छोटे उल्कापिंडों को पृथ्वी तक पहुँचने से पहले जलाकर नष्ट करना।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य :-

  1. वायुमंडल का लगभग 99% भार 32 किलोमीटर तक सीमित है।
  2. क्षोभमंडल में सभी मौसमी घटनाएँ होती हैं।
  3. सामान्य ताप पतन दर 6.5°C प्रति किलोमीटर होती है।
  4. ओजोन परत समतापमंडल में स्थित होती है।
  5. वायुमंडल का सबसे कम तापमान मध्यमंडल में पाया जाता है।
  6. रेडियो तरंगों का परावर्तन मुख्य रूप से आयनमंडल से होता है।
  7. बाह्यमंडल वायुमंडल की सबसे बाहरी परत है।
  8. जेट पवनें क्षोभसीमा के निकट बहती हैं।
  9. ध्रुवीय प्रकाश आयनमंडल से संबंधित महत्वपूर्ण घटना है।

और पढ़े :-विश्व की प्रमुख जलसंधियाँ (Straits)

निष्कर्ष :-

वायुमंडल पृथ्वी की सुरक्षा कवच के समान कार्य करता है। इसकी प्रत्येक परत की अपनी अलग विशेषता और उपयोगिता है। क्षोभमंडल हमें मौसम प्रदान करता है, समतापमंडल की ओजोन परत हानिकारक किरणों से रक्षा करती है, मध्यमंडल उल्कापिंडों को नष्ट करता है, आयनमंडल रेडियो संचार को संभव बनाता है और बाह्यमंडल अंतरिक्ष की ओर संक्रमण क्षेत्र का कार्य करता है।

यदि आप भूगोल, UPSC, SSC, PCS, रेलवे, NDA, CDS, CTET, UPTET या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो वायुमंडल की संरचना एवं उसकी विभिन्न परतों का अध्ययन अवश्य करें। यह विषय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ पृथ्वी के प्राकृतिक वातावरण को समझने में भी सहायता करता है।

 

 

 

भारत की प्रमुख झीलें: भारत की मीठे, खारे और लैगून झीलों की सम्पूर्ण जानकारी

इस लेख में भारत की प्रमुख झीलें/झीलों का विस्तृत परिचय दिया गया है। भारत प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है। यहाँ हिमालय की ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं से लेकर विशाल तटीय क्षेत्रों तक विभिन्न प्रकार की झीलें पाई जाती हैं। भारत की झीलें न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक हैं, बल्कि सिंचाई, मत्स्य पालन, पर्यटन, जलविद्युत उत्पादन, जैव विविधता और स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, राज्य लोक सेवा आयोग, रेलवे, बैंकिंग तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में भारत की प्रमुख झीलों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

भारत की प्रमुख झीलें

और पढ़े :-विश्व की प्रमुख जलसंधियाँ (Straits)

भारत की प्रमुख झीलें :-

1. वूलर झील (Wular Lake):-

वूलर झील जम्मू एवं कश्मीर में स्थित भारत की सबसे बड़ी मीठे (ताजे) जल की झील है। यह झेलम नदी पर निर्मित गोखुर (Oxbow) झील का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है। यह झील कश्मीर घाटी की जल व्यवस्था तथा मत्स्य पालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

2. डल झील (Dal Lake):-

डल झील श्रीनगर (जम्मू एवं कश्मीर) में स्थित प्रसिद्ध हिमानी निर्मित मीठे जल की झील है। इसकी लंबाई लगभग 8 किलोमीटर तथा चौड़ाई लगभग 3 किलोमीटर है। कई स्थानों पर दलदल होने के कारण इसकी गहराई अपेक्षाकृत कम है। शिकारे और हाउसबोट इस झील की प्रमुख पहचान हैं।

3. सांभर झील (Sambhar Lake) :-

राजस्थान के जयपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित सांभर झील भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारे जल की झील है। यह देश में नमक उत्पादन का प्रमुख केंद्र है तथा भारत की नमक आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

4. देबर झील (Jaisamand Lake) :-

राजस्थान के उदयपुर में स्थित देबर झील मीठे जल की प्रसिद्ध झील है। इसे भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील माना जाता है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में उदयपुर के राजा द्वारा कराया गया था। यह अपने विशाल जलाशय और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है।

5. लोकटक झील (Loktak Lake) :-

मणिपुर में स्थित लोकटक झील उत्तर-पूर्व भारत की सबसे प्रसिद्ध मीठे पानी की झील है। यह विश्वभर में तैरती द्वीपीय झील के रूप में जानी जाती है। इस झील में स्थित केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान विश्व का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान है। यहाँ तैरते हुए घास-पौधों के द्वीपों को फुमदी (Phumdi) कहा जाता है। इसी झील पर जलविद्युत परियोजना भी संचालित है।

6. चिल्का झील (Chilika Lake) :-

ओडिशा में स्थित चिल्का झील भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील है। यह झींगा उत्पादन, मत्स्य पालन तथा प्रवासी पक्षियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है और देश का महत्वपूर्ण आर्द्र क्षेत्र भी है।

7. कोलेरू झील (Kolleru Lake) :-

आंध्र प्रदेश में कृष्णा और गोदावरी डेल्टा के बीच स्थित कोलेरू झील ताजे जल की प्रमुख झील है। यह अनेक प्रवासी पक्षियों का निवास स्थान है और जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

8. पुलिकट झील (Pulicat Lake) :-

आंध्र प्रदेश के तट पर स्थित पुलिकट झील खारे जल की लैगून झील है। यह समुद्र से बालू की भित्ति द्वारा अलग होकर बनी है। यह भारत की महत्वपूर्ण तटीय झीलों में से एक है।

9. वेंबनाद झील (Vembanad Lake) :-

केरल तट पर स्थित वेंबनाद झील खारे जल की प्रसिद्ध लैगून झील है। इसी झील में वेलिंगटन द्वीप स्थित है, जहाँ राष्ट्रीय नौकायन प्रतियोगिताएँ आयोजित होती हैं। भारत का सबसे छोटा राष्ट्रीय राजमार्ग NH-47A भी इसी द्वीप पर स्थित है।

10. लोनार झील (Lonar Lake) :-

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील उल्कापात/ज्वालामुखीय गतिविधि से निर्मित अद्वितीय झील है। यह विश्व की दुर्लभ भू-वैज्ञानिक धरोहरों में गिनी जाती है।

11. रेणुका झील :-

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित रेणुका झील मीठे जल की झील है। यहाँ चिड़ियाघर तथा लायन सफारी भी स्थित है, जिससे यह पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गई है।

12. रूपकुंड झील :-

उत्तराखण्ड के मध्य हिमालय में स्थित रूपकुंड झील प्राकृतिक मीठे जल की झील है। यह ऊँचाई पर स्थित होने के कारण पर्वतारोहियों और ट्रेकिंग प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

13. सास्थमकोट्टा झील :-

केरल के कोल्लम जिले में स्थित सास्थमकोट्टा झील राज्य की सबसे बड़ी मीठे जल की झील मानी जाती है और पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत है।

14. सातताल (सत्ता झील) :-

उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में स्थित सातताल कई झीलों का समूह है। यह प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग माना जाता है तथा प्रकृति प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।

15. सूरजताल :-

हिमाचल प्रदेश में बारालाचा दर्रे के निकट स्थित सूरजताल ताजे जल की ऊँचाई वाली झील है। यह हिमालय की प्रमुख झीलों में शामिल है।

16. तवा जलाशय (तवावोहिर झील) :-

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में नर्मदा नदी पर बाँध बनाकर इस विशाल जलाशय का निर्माण किया गया है। यह सिंचाई, मत्स्य पालन तथा जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

17. सोंगमो (छांगू) झील :-

सिक्किम के गंगटोक जिले में स्थित सोंगमो झील मीठे जल की अत्यंत सुंदर हिमालयी झील है। वर्षभर पर्यटकों का यहाँ आगमन होता है।

18. अष्टमुडी झील :-

केरल के कोल्लम जिले में स्थित अष्टमुडी झील एक लैगून (कयाल) झील है जिसकी आठ शाखाएँ हैं। इसे रामसर समझौते के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्र भूमि घोषित किया गया है।

19. भीमताल झील :-

उत्तराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में स्थित भीमताल झील मीठे जल की सुंदर झील है। इसके मध्य में एक छोटा द्वीप स्थित है। यह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का प्रमुख आकर्षण है।

20. चेम्बरमबक्कम झील :-

तमिलनाडु के चिंगलपट्टू जिले में चेन्नई से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण स्थित चेम्बरमबक्कम झील से अड़्यार नदी का उद्गम होता है। यह चेन्नई के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत भी है।

21. पंचभद्रा झील :-

राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित पंचभद्रा झील खारे जल की झील है। यहाँ नमक उत्पादन किया जाता है, लेकिन वर्षा की कमी तथा प्रदूषण के कारण झील का क्षेत्रफल लगातार घट रहा है।

22. चो-ल्हामु झील :-

सिक्किम के उत्तरी भाग में लगभग 18,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित चो-ल्हामु झील भारत की सबसे ऊँचाई पर स्थित झील मानी जाती है। तीस्ता नदी का उद्गम भी इसी झील से होता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य :-

– भारत की सबसे बड़ी मीठे जल की झील — वूलर झील
– भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारे जल की झील — सांभर झील
– भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील — चिल्का झील
– भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील — देबर (जयसमंद) झील
– भारत की सबसे ऊँची झील — चो-ल्हामु झील
– विश्व का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान — केबुल लामजाओ (लोकटक झील)
– उल्कापात से निर्मित झील — लोनार झील
– आठ शाखाओं वाली झील — अष्टमुडी झील

निष्कर्ष :-

भारत की झीलें प्राकृतिक धरोहर होने के साथ-साथ देश की जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, पर्यटन, मत्स्य पालन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। वूलर, डल, सांभर, चिल्का, लोकटक, वेंबनाद, लोनार, चो-ल्हामु और अन्य प्रमुख झीलें अपने-अपने विशिष्ट भौगोलिक एवं पारिस्थितिक महत्व के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं। यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो भारत की इन प्रमुख झीलों के स्थान, प्रकार तथा विशेषताओं का अध्ययन अवश्य करें।

विश्व की प्रमुख झीलें स्थिति, क्षेत्रफल और महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान (GK) तथ्य

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ‘विश्व भूगोल’ (World Geography) एक अत्यंत महत्वपूर्ण खंड है। इस खंड के अंतर्गत “विश्व की प्रमुख झीलें” (Major Lakes of the World) से संबंधित प्रश्न अक्सर बहुविकल्पीय या मिलान करने वाले प्रश्नों के रूप में पूछे जाते हैं। चाहे वह झीलों की भौगोलिक स्थिति (Location) हो, उनका क्षेत्रफल (Area) हो, या फिर उनकी विशिष्ट पारिस्थितिक विशेषताएं—एक गंभीर छात्र के रूप में आपको इन सभी तथ्यों की गहरी समझ होनी चाहिए। इस व्यापक ब्लॉग में, हम प्रामाणिक भौगोलिक आंकड़ों के आधार पर विश्व की सबसे बड़ी झीलों की विस्तृत समीक्षा करेंगे, ताकि आपकी आगामी परीक्षाओं में एक भी अंक न छूटे।

झील क्या है और इनका भौगोलिक महत्व क्या है?

भू-आकृति विज्ञान (Geomorphology) के अनुसार, झील (Lake) जल का वह स्थिर भाग है जो चारों तरफ से स्थलखंडों (Landmass) से घिरा होता है। झील का दूसरा मुख्य गुण उसका स्थायित्व और प्रवाहहीनता है। झीलें न केवल मीठे पानी (Freshwater) का प्रमुख स्रोत होती हैं, बल्कि वे उस क्षेत्र की जलवायु, जैव विविधता और स्थानीय आर्थिकी (जैसे पर्यटन और मत्स्य पालन) को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित करती हैं। परीक्षाओं में अक्सर झीलों को उनके आकार (Largest Lakes in the World) या उनकी लवणता (Salinity) के आधार पर पूछा जाता है।

विश्व की प्रमुख झीलें: विस्तृत विवरण (Detailed Analysis) :-

आइए अब हम विश्व की सबसे महत्वपूर्ण झीलों का क्रमानुसार और सविस्तार अध्ययन करते हैं जो परीक्षाओं के लिए सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं:

विश्व की प्रमुख झीलें

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1. कैस्पियन सागर झील (Caspian Sea):-

स्थिति (Location): रूस, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, अजरबैजान और ईरान (एशिया और यूरोप की सीमा पर)।
क्षेत्रफल: 3,71,000 वर्ग किलोमीटर

  •  यह विश्व की सबसे बड़ी झील (Largest Lake in the World) है। अपने विशाल आकार के कारण ही इसे ‘सागर’ कहा जाता है।
  •  यह एक खारे पानी की झील (Saltwater Lake) है।
  •  मानचित्र आधारित प्रश्नों के लिए इसके आस-पास के देशों के नाम ( TARI K: Turkmenistan, Azerbaijan, Russia, Iran, Kazakhstan) याद रखना आवश्यक है।

2. सुपीरियर झील (Lake Superior):-

स्थिति (Location): अमेरिका (USA) व कनाडा की सीमा पर (उत्तर अमेरिका महाद्वीप)। 
क्षेत्रफल: 82,414 वर्ग किलोमीटर
 

  • यह क्षेत्रफल के हिसाब से विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील (Largest Freshwater Lake) है।
  •  यह उत्तरी अमेरिका की ‘महान झीलों’ (Great Lakes) में से एक है।

3. विक्टोरिया झील (Lake Victoria):-

स्थिति (Location): यूगांडा, तंजानिया और केन्या (अफ़्रीका महाद्वीप)। 
क्षेत्रफल: 68,800 वर्ग किलोमीटर
 

  • यह अफ़्रीका महाद्वीप की सबसे बड़ी झील है।
  •  विश्व की सबसे लंबी नदी ‘नील नदी’ (Nile River) का उद्गम इसी विक्टोरिया झील से होता है।
  • भूमध्य रेखा (Equator) इस झील के बीच से होकर गुजरती है, जो परीक्षाओं का एक अत्यंत लोकप्रिय तथ्य है।

4. अरल सागर झील (Aral Sea):-

स्थिति (Location): कजाकिस्तान व उज्बेकिस्तान (मध्य एशिया)।
क्षेत्रफल: 68,000 वर्ग किलोमीटर
 

  • यह झील कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान की प्राकृतिक सीमा बनाती है।
  •  आधुनिक समय में मानवीय हस्तक्षेप और अत्यधिक सिंचाई के कारण यह झील लगभग 90% तक सूख चुकी है, जो वैश्विक पर्यावरण चर्चाओं का मुख्य विषय है।

5. मिशिगन झील (Lake Michigan):-

स्थिति (Location): संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)।
क्षेत्रफल: 58,000 वर्ग किलोमीटर
उत्तरी अमेरिका की पांच ‘महान झीलों’ (Great Lakes) में से यह एकमात्र ऐसी झील है जो पूरी तरह से अमेरिका के भीतर स्थित है।
 प्रसिद्ध ‘शिकागो’ शहर इसी झील के किनारे बसा हुआ है।

6. टंगानिका झील (Lake Tanganyika) :-

स्थिति (Location): तंजानिया, जाम्बिया, बुरुंडी व कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य (अफ़्रीका)।
क्षेत्रफल: 32,893 वर्ग किलोमीटर
 

  • यह विश्व की सबसे लंबी (Longest Lake) और बैकाल झील के बाद दूसरी सबसे गहरी मीठे पानी की झील है।
  •  यह अफ़्रीकी रिफ्ट वैली (Rift Valley) में स्थित है।

7. बैकाल झील (Lake Baikal):-

स्थिति (Location): रूस (साइबेरिया क्षेत्र)।
क्षेत्रफल: 31,500 वर्ग किलोमीटर
 

  • यह विश्व की सबसे गहरी झील (Deepest Lake in the World) है। इसकी गहराई लगभग 1,642 मीटर है।
  •  इसे “साइबेरिया का मोती” (Pearl of Siberia) भी कहा जाता है। पानी के आयतन (Volume) की दृष्टि से यह दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।

8. टिटिकाका झील (Lake Titicaca):-

स्थिति (Location): पेरू व बोलीविया (दक्षिण अमेरिका)।
क्षेत्रफल: 8,001 वर्ग किलोमीटर

  • यह विश्व की सबसे ऊंची नौगम्य झील (Highest Navigable Lake) है, जो एंडीज पर्वतमाला पर स्थित है।

9. मृत सागर (Dead Sea):-

स्थिति (Location): जॉर्डन, इजरायल और फिलिस्तीन।
 

  • यह समुद्र तल से लगभग 430 मीटर नीचे, पृथ्वी का सबसे निचला बिंदु (Lowest Point on Earth) है।
  •  इसकी अत्यधिक लवणता (High Salinity) के कारण इसमें कोई भी जीव जीवित नहीं रह सकता।

विश्व की प्रमुख झीलों की त्वरित सूची (Quick Revision Table):-

क्रम संख्या झील का नाम स्थित क्षेत्रफल (वर्ग कि.मी.)
1कैस्पियन सागर झील रूस, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ईरान 371000
2सुपीरियर झीलअमेरिका व कनाडा82414
3विक्टोरिया झीलयूगांडा, तंजानिया, केन्या 68800
4अरल सागर झीलकजाकिस्तान व उज्बेकिस्तान68000
5ह्यूरन झीलयू०एस०ए० व कनाडा 59600
6मिशिगन झीलयू०एस०ए०58000
7टंगानिका झीलतंजानिया, जाम्बिया, बुरुंडी व कांगो | 32893
8बैकाल झीलरूस31500
9ग्रेट बियर झीलकनाडा31080
10मलावी झीलमलावी, मोजाम्बिक व तंजानिया30044
11ग्रेट स्लेव झीलकनाडा28930
12ईरी झीलयू०एस०ए० व कनाडा 25719
13विनिपेग झीलकनाडा24514
14न्यासा झीलमलावी, मोजाम्बिक, तंजानिया22490
15ऑन्टारियों झीलयू०एस०ए० व कनाडा19477
16लेडोगा झीलरूस18130
17चाड झीलचाड (अफ़्रीका)17800
18बाल्खश झीलकजाकिस्तान16400
19बोस्टक झीलअंटार्कटिका15690
20नासिर झीलमिस्र (Egypt) 12900
21ओनेगा झील रूस9891
22निकारागुआ झीलनिकारागुआ8135
23टिटिकाका पेरू व बोलीविया 8001

 परीक्षाओं में झीलों को ‘उत्तर से दक्षिण’ या ‘पूर्व से पश्चिम‘ के क्रम में व्यवस्थित करने वाले प्रश्न बहुत लोकप्रिय हैं। विशेष रूप से उत्तरी अमेरिका की महान झीलों (Great Lakes: Superior, Huron, Michigan, Erie, Ontario) का पश्चिम से पूर्व का क्रम अवश्य याद रखें।

निष्कर्ष (Conclusion):-

विश्व की झीलें न केवल हमारे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, बल्कि परीक्षाओं की दृष्टि से भी ज्ञान का एक बड़ा स्रोत हैं। इस लेख के माध्यम से हमने कैस्पियन सागर, सुपीरियर, विक्टोरिया और बैकाल जैसी प्रमुख झीलों से जुड़े उन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर किया है जो अक्सर परीक्षाओं का हिस्सा बनते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) :-

प्रश्न 1: विश्व की सबसे बड़ी झील कौन सी है?
उत्तर: विश्व की सबसे बड़ी झील ‘कैस्पियन सागर’ (Caspian Sea) है, जिसका क्षेत्रफल 3,71,000 वर्ग किलोमीटर है। यह खारे पानी की झील है।

प्रश्न 2: विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील कौन सी है?
उत्तर: क्षेत्रफल के आधार पर विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील ‘सुपीरियर झील’ (Lake Superior) है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है।

प्रश्न 3: विश्व की सबसे गहरी झील कौन सी है और यह कहाँ स्थित है?
उत्तर: विश्व की सबसे गहरी झील ‘बैकाल झील’ (Lake Baikal) है, जो रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित है। इसकी गहराई लगभग 1,642 मीटर है।

प्रश्न 4: नील नदी का उद्गम किस झील से होता है?
उत्तर: दुनिया की सबसे लंबी नदी ‘नील नदी’ का उद्गम अफ्रीका महाद्वीप में स्थित ‘विक्टोरिया झील’ (Lake Victoria) से होता है।

प्रश्न 5: विश्व की सबसे ऊंची नौगम्य (Navigable) झील कौन सी है?
उत्तर: दक्षिण अमेरिका के पेरू और बोलीविया देश की सीमा पर स्थित ‘टिटिकाका झील’ (Lake Titicaca) विश्व की सबसे ऊंची नौगम्य झील है।

कर्क रेखा(kark rekha)वह काल्पनिक लकीर जिसने भारत को दो हिस्सों में बांटा

कर्क रेखा(kark rekha)/कर्क वृत्त (Tropic of CANCER) गोलार्द्ध में एक अक्षांश वृत्त है। जो ग्लोब पर पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई एक काल्पनिक रेखा है।

kark rekha

और पढ़े :- विश्व की स्थानीय पवने|चिनूक| फाॅन| सिराको|हरमट्टन|नार्वेस्टर

  • कर्क रेखा, विषुवत रेखा / भूमध्य रेखा से 23 डिग्री 30 मिनट उत्तर (23.30′ उत्तर) की ओर समानान्तर रेखा है।
  • कर्क रेखा पर सूर्य 21 जून को लम्बवत् चमकता है। इसे कर्क संक्रान्ति या ग्रीष्म संक्रान्ति (Summer Solstice) भी कहा जाता है। क्योंकि इस समय उत्तरी गोलार्द्ध में अधिकतम गर्मी पड़ती है।
  • 21 जून उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन होता है व रात सबसे छोटी होती है। क्योकि 21 जून को सूर्य कर्क रेखा के एकदम ऊपर होता है| इस दिन सबसे अधिक गर्मी होती है (स्थानीय मौसम को छोड़कर), क्योंकि सूर्य की किरणें यहां एकदम लंबवत पड़ती हैं।
  • 21 जून को नार्वे जो उत्तरी अक्षांश पर स्थित है, में अर्द्धरात्रि का सूर्य (Midnight Sun) दिखाई पड़ता है। इस तिथि को नार्वे में 24 घंटे का दिन होता है।
  • सूर्य एक महीने में लगभग 8 डिग्री अक्षांश की तथा एक दिन में 16′ मिनट अक्षांश की यात्रा करता है।
  • अधसौर बिन्दु पृथ्वी के चतुर्विक एक पथ बनाता है जो एक स्प्रिंग की तरह पृथ्वी को कर्क तथा मकर रेखाओं के मध्य लपेटे रहता है। इस पथ को क्रान्तिक वृत्त (Ecliptic) कहा जाता है।
  • भारत में, कर्क रेखा आठ राज्यों से होकर गुजरती है: गुजरात (जसदन), राजस्थान (कलिंजर), मध्य प्रदेश (शाजापुर), छत्तीसगढ़ (सोनहट), झारखंड (लोहरदगा), त्रिपुरा (उदयपुर), मिजोरम (चम्फाई), पश्चिम बंगाल (कृष्णानगर)।
  • kark rekha

 

  • भारत की माही नदी (Mahi River) कर्क रेखा को दो बार काटती है।

 

कर्क रेखा 3 महाद्वीपों के  17 देशों से होकर गुजरती है।

क्रम संख्या महाद्वीप का नाम देश के नाम
1उत्तरी अमेरिकाबहामास (द्वीपसमूह), मेक्सिको
2अफ्रीकामिस्र, लीबिया, नाइजर, अल्जीरिया, माली, पश्चिमी सहारा, मॉरिटानिया
3एशियाताइवान, चीन, म्यांमार, बांग्लादेश, भारत, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब

kark rekha

विश्व की प्रमुख जलसंधियाँ (Straits)

जलसंधियाँ (Straits) पानी का एक संकीर्ण (तंग) मार्ग होता है, जो दो बड़े जल निकायों (जैसे दो समुद्र, महासागर या बड़े जलाशय) को आपस में जोड़ता है। यह आमतौर पर दो भू-भागों (जैसे द्वीपों या महाद्वीपों) के बीच स्थित होता है और जहाज़ों के लिए नौवहन योग्य होता है। अर्थात

जलसंधियाँ (Straits)और पढ़े :-प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ| गोदावरी| कृष्णा| कावेरी|महानदी 

पानी के ऐसे तंग मार्ग को जलसंधि कहते हैं जो दो बड़े पानी के समूहों को जोड़ता हो और जिसमें से नौकाएँ गुज़रकर एक बड़े जलाशय से दूसरे बड़े जलाशय तक जा सकें।
इसका आकार अक्सर डमरू जैसा होता है, इसलिए इसे जलडमरूमध्य या जलडमरू भी कहा जाता है।

विश्व की प्रमुख जलसंधियाँ (Straits) निम्नलिखित है :-

क्रम संख्या जलसन्धि का नाम भू भाग को अलग करता हैजलीय भाग को अलग करता है
1बेरिंग जल संधिएशिया (रूस) एवं उत्तरी अमेरिका (आलस्का)पूर्वी साईबेरियन सागर एवं बेरिंग सागर
2लापैरोज जल संधिसखालिन द्वीप एवं हैकेडो द्वीपओखोट्स सागर एवं जापान सागर
3तत्तर जल संधि पूर्वी रूस एवं सखालिनओखोट्स सागर एवं जापान सागर
4फोरमोसा जल संधिताइवान एवं चीनपूर्वी चीन सागर एवं दक्षिणी चीन सागर
5 लूजोन जल संधिताइवान एवं लूजोन (फिलीपिंस)दक्षिणी चीन सागर एवं प्रशांत महासागर
6मलक्का जल संधिमलय प्रायद्वीप एवं सुमात्राजावा सागर (द. चीन सागर) एवं बंगाल की खाड़ी
7जाहौर जल संधिसिंगापुर एवं मलेशियादक्षिणी चीन सागर एवं मलक्का जलसंधि
8होरमुज जल संधिसं.अ. अमीरात एवं ईरानफारस की खाड़ी एवं ओमान की खाड़ी
9बास्पोरस जल संधिएशिया एवं यूरोपकाला सागर एवं मरमरा (एजियन) सागर
10बाव - एल मंडेव जलसंधियमन - जिबूतीलाल सागर एवं अरब सागर
11 कारीमाटा जलसंधिइण्डोनेशियादक्षिणी चीन सागर एवं जावा सागर
12कोरिया जल संधिदक्षिण कोरिया एवं क्यूशू (जापान)पीला सागर एवं जापान सागर
13सुण्डा जल संधिजावा एवं सुमात्राजावा सागर एवं हिंद महासागर
14मकस्सार जल संधिबोर्नियो (केलिमंटन) एवं सेलिबीज द्वीपसेलेवीज सागर एवं जावा सागर
15डारडनेल्स जल संधि एशिया एवं यूरोपमरमरा सागर एवं भूमध्य सागर
16 पाक जल संधिभारत एवं श्रीलंका मन्नार एवं बंगाल की खाड़ी
17सुशीमा जलसंधिजापानजापान सागर एवं पूर्वी चीन सागर
18सुगारु जलसंधिजापानजापान सागर एवं प्रशांत महासागर
19नेमुरो जलसंधिजापानप्रशान्त महासागर
20 टोकरा जलसंधिजापानपूर्वी चीन सागर एवं प्रशांत महासागर
21 वाला बैंक जलसंधिपलावान-बोर्नियोंटाइरेनियन सागर और भूमध्यसागर
22डाबर जल संधिइंग्लैण्ड-फ्रांसइंग्लिश चैनल एवं उत्तरी सागर
23डेनमार्क जलसंधिइंग्लैण्ड-फ्रांसउत्तरी अटलांटिक एवं आर्कटिक महासागर
24जिब्राल्टर जल सन्धि ('भूमध्यसागर की कुंजी' के नाम से प्रसिद्ध ) यूरोप (स्पेन) और अफ्रीका (मोरक्को)भूमध्यसागर और अटलांटिक महासागर
25ओरन्टो जलसन्धि इटली और बाल्कन प्रायद्वीपएड्रियाटिक सागर और आयोनियन सागर । ।।
26 नार्थ चैनलआयरलैण्ड-इंग्लैण्डआयरिश सागर एवं अटलांटिक सागर
27बोनीफेसियो जलसन्धिसार्डिनिया (इटली) और कोर्सिका द्वीप (फ्रांस) टाइरेनियन सागर और भूमध्यसागर
28डारडानेल्स जलसन्धि*बाल्कन प्रायद्वीप और अनातोलिया प्रायद्वीप मरमरा का सागर और एजिअन सागर
29 मेसिना जलसन्धिसिसली और इटली प्रायद्वीप टाइरेनियन सागर और भूमध्यसागर
30कर्च जलसन्धिकर्च (यूक्रेन) और रूसअजोव सागर और काला सागर
31बासपोरस जलसन्धिइस्तानबुल और अनातोलिया प्रायद्वीप (तुर्की) काला सागर और मरमरा का सागर
32 नेअर्स जलसंधि ग्रीनलैंड एंव एलिसमेरे द्वीप ।आर्कटिक महासागर एवं बैफिन की खाड़ी को
33 हड्सन जल संधिबैफिन द्वीप एवं ऊनगावा प्रायद्वीप (क्यूबेक) हड्सन की खाड़ी एवं लैब्राडोर सागर ।
34 बेली द्वीप जल संधि लैब्रोडोर एवं न्यूफाउंडलैंड।सेंट लॉरेंस की खाड़ी एवं अटलांटिक महासागर
35 यूकाटन जल संधियुकाटन प्रायद्वीप (उ0पू0 मैक्सिको) एवं क्यूबामैक्सिको की खाड़ी एवं कैरीबियन सागर
36 बेरिंग जल संधि चुक्ची प्रायद्वीप रूस (एशिया) एवं अलास्का (उ0 अमेरिका) आर्कटिक महासागर एवं बैरिंग सागर ।
37डेविस जल संधिग्रीनलैंड एवं बैफिन द्वीप। बैफिन की खाड़ी एवं लैब्राडोर सागर
38फ्लोरिडा जल संधिफ्लोरिडा एवं क्यूबामैक्सिको की खाड़ी एवं अटलांटिक महासागर।
मैगलेन जलसन्धि दक्षिण अमेरिका और तिएरा डेल फ्यूगो अटलांटिक महासागर और प्रशान्त महासागर
ड्रेक जलसन्धि दक्षिण अमेरिका अंटार्कटिक दक्षिण अटलांटिक महासागर और प्रशान्त महासागर

अमेज़न नदी (Amazon River)

“पृथ्वी का फेफड़ा” (lungs of Earth) कहीं जाने वाली अमेज़न नदी (Amazon River) विश्व की सबसे चौड़ी तथा विशाल जलराशि की नदी है।

अमेज़न नदी

और पढ़े :-सिंधु नदी तंत्र| झेलम(वितस्ता)| चेनाब (अस्किनी)| रावी 

नाम – अमेज़न नदी (Amazon River)

लंबाई – लगभग 6,575–7,000 किमी (विश्व की सबसे लंबी या दूसरी सबसे लंबी नदी – नील नदी से विवाद) |

उद्गम स्थल – पेरू के एंडीज पर्वत में मिसमी चोटी (Nevado Mismi) से

मुख्य सहायक नदियाँ – मेडेरा, नेग्रो, टापाजोस, जुरुआ, पुरुस, जावारी, यूपुरा |

सबसे बड़ी सहायक नदी- रियो नेग्रो (Rio Negro)

प्रवाह क्षेत्र – दक्षिण अमेरिका के 9 देश: पेरू, ब्राजील, कोलंबिया, वेनेजुएला, इक्वाडोर, बोलिविया, गुयाना, सूरीनाम, फ्रेंच गुयाना |

डेल्टा – विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा नहीं (गंगा-ब्रह्मपुत्र सबसे बड़ा)

जल प्रवाह – विश्व में सर्वाधिक (लगभग 2,09,000 घन मीटर/सेकंड) |

वर्षा – विश्व में सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र (250–400 सेमी वार्षिक)

वन – अमेज़न वर्षावन (विश्व का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय वर्षावन) |

जैव-विविधता – विश्व का सबसे अधिक जैव-विविधता वाला क्षेत्र (लाखों प्रजातियाँ)

मछलियाँ – पिरान्हा, अरापाइमा (दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की मछली), इलेक्ट्रिक ईल

जनजातियाँ – यानोमामी, कायापो, तिकुना आदि

प्रमुख शहर – मानुस (ब्राजील), इकितोस (पेरू)

आर्थिक महत्व – जल परिवहन, मत्स्य पालन, जल विद्युत, पर्यटन

पर्यावरणीय समस्या – वनों की कटाई (Deforestation), जलवायु परिवर्तन, खनन प्रदूषण |

महत्वपूर्ण तथ्य
– विश्व की सबसे अधिक जल मात्रा वाली नदी (20% मीठा पानी अटलांटिक में छोड़ती है)
– अमेज़न वर्षावन को “पृथ्वी का फेफड़ा” (Earth’s Lungs) कहा जाता है
– विश्व की सबसे चौड़ी नदी भी (मानसून में 48 किमी तक चौड़ी हो जाती है)
– नदी में 3,000+ मछली प्रजातियाँ (गंगा में सिर्फ 200-250)
– पेरू में इसका नाम “सोलिमोन्स” (Solimões) है, ब्राजील में “अमेज़न”
मीठे पानी का डॉल्फिन (Pink River Dolphin) केवल यहीं पायी जाती है।

यह दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में बहती है।

इसका उद्गम  एण्डीज़ पर्वत (पेरू) से होता है।

यह अटलांटिक महासागर में मिलती है।

इसकी लंबाई लगभग 6400 किलोमीटर है।

अमेज़न नदी के आसपास का क्षेत्र अमेज़न रेनफ़ॉरेस्ट कहलाता है।

इस क्षेत्र में सबसे अधिक वर्षा होती है और यह वन्य जीवों की बहुत विविधता वाला क्षेत्र है।

अमेज़न नदी – प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1: अमेज़न नदी किस महाद्वीप में बहती है?

उत्तर: दक्षिण अमेरिका

प्रश्न 2: अमेज़न नदी का उद्गम कहाँ होता है?

उत्तर: एण्डीज़ पर्वत, पेरू में

प्रश्न 3: अमेज़न नदी किस महासागर में मिलती है?

उत्तर: अटलांटिक महासागर

प्रश्न 4: अमेज़न नदी की लगभग लंबाई कितनी है?

उत्तर: लगभग 6400 किलोमीटर

प्रश्न 5: अमेज़न नदी के आसपास का घना जंगल क्या कहलाता है?

उत्तर: अमेज़न रेनफ़ॉरेस्ट

प्रश्न 6: अमेज़न नदी दुनिया की किस प्रकार की नदी मानी जाती है?

उत्तर: दुनिया की सबसे अधिक जल वाली नदी

प्रश्न 7: अमेज़न क्षेत्र में वर्षा कैसी होती है?

उत्तर: बहुत अधिक

प्रश्न 8: अमेज़न रेनफ़ॉरेस्ट में किसकी अधिक विविधता पाई जाती है?

उत्तर: वनस्पति और वन्य जीवों की

 

भारत की झीलें | 8 प्रकार की झीलें| विवर्तनिक| क्रेटर| हिमनदीय

भारत की झीलें: प्रकृति की विविधता और सौंदर्य, भारत अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता के साथ, विभिन्न प्रकार की झीलों का घर है, जो प्रकृति की अनुपम देन हैं। ये झीलें न केवल पर्यावरणीय और पारिस्थितिक महत्व रखती हैं, बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं।

भारत में झीलें विवर्तनिक, हिमनदीय, ज्वालामुखीय, तटीय, गोखुर, कृत्रिम, क्रेटर और भूस्खलन झीलों के रूप में वर्गीकृत की जा सकती हैं। यह ब्लॉग इन आठ प्रकार की झीलों, उनके निर्माण, विशेषताओं और प्रमुख उदाहरणों पर प्रकाश डालता है, जो भारत की प्राकृतिक विरासत को दर्शाते हैं।

भारत की झीलें

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1. विवर्तनिक झीलें (Tectonic Lakes) :-

विवर्तनिक झीलें भूपर्पटी की गतियों, जैसे भ्रंश (faulting) या रिफ्टिंग, के कारण बनती हैं।                                                                            इस प्रकार की  झीलें गहरी और लंबी होती हैं, जो रिफ्ट घाटियों में पाई जाती हैं।                                                                                          भारत में वूलर झील (जम्मू-कश्मीर) इसका प्रमुख उदाहरण है, जो झेलम नदी पर बनी देश की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।                        राजस्थान की नक्की झील (माउंट आबू) भी भ्रंशों से बनी है। कुमाऊं हिमालय की भीमताल और नैनीताल जैसी झीलें भी विवर्तनिक गतिविधियों का परिणाम हैं। भारत की झीलें जैव विविधता और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

2. हिमनदीय झीलें (Glacial Lakes):-

हिमनदीय झीलें हिमनदों के पीछे हटने से बने गड्ढों में पानी भरने से बनती हैं। ये उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आम हैं। सिक्किम की त्सोमगो (छांगु) झील और उत्तराखंड की रूपकुंड झील इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

हिमनदीय झीलें ठंडे, साफ पानी और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के कारण इन झीलों में हिमनदीय बाढ़ (GLOF) का खतरा बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय समुदायों और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है।

भारत की झीलें ट्रेकिंग और धार्मिक पर्यटन को आकर्षित करती हैं।

3. ज्वालामुखीय झीलें (Volcanic Lakes)/क्रेटर झीलें (Crater Lakes) :-

ज्वालामुखीय गतिविधियों से बनी झीलें ज्वालामुखीय क्रेटरों या गड्ढों में बनती हैं।

भारत में ऐसी झीलें दुर्लभ हैं, लेकिन महाराष्ट्र की लोनार झील एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह एक उल्कापात (meteorite impact) से बनी क्रेटर झील है, जो अपने खारे पानी और अद्वितीय जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इसका पानी क्षारीय (alkaline) है, जो इसे वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।

यह झील स्थानीय और वैश्विक शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का केंद्र है। क्रेटर झीलें दुर्लभ होती हैं, लेकिन इनका सौंदर्य और वैज्ञानिक महत्व भारत की भूवैज्ञानिक विविधता को रेखांकित करता है।

लोनार झील UNESCO विश्व धरोहर स्थल के लिए नामांकित है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

4. तटीय झीलें (Coastal/Lagoon Lakes):-

तटीय झीलें समुद्र तटों के पास रेत के अवरोधों (sandbars) या लैगून के कारण बनती हैं। ओडिशा की चिल्का झील, जो भारत की सबसे बड़ी खारी झील है, इसका प्रमुख उदाहरण है। यह प्रवासी पक्षियों, जैसे फ्लेमिंगो, के लिए महत्वपूर्ण है और रामसर साइट के रूप में मान्यता प्राप्त है।

केरल की वेम्बनाड झील, जो कयाल प्रणाली का हिस्सा है, भी तटीय झील का उदाहरण है। ये झीलें मछली पालन, पर्यटन और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन समुद्र स्तर वृद्धि से खतरे में हैं।

5. गोखुर झीलें (Oxbow Lakes):-

गोखुर झीलें नदियों के घुमावदार मार्ग (meanders) के कटने से बनती हैं, जब नदी अपने पुराने मार्ग को छोड़ देती है। उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के मैदानों में ऐसी कई झीलें पाई जाती हैं।

जैसे बिहार की कावर झील एक गोखुर झील है, जो प्रवासी पक्षियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। ये झीलें मीठे पानी की आपूर्ति और मछली पालन के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अवसादन (siltation) के कारण इनका क्षेत्रफल घट रहा है।

6. कृत्रिम झीलें (Man-made Lakes):-

कृत्रिम झीलें मानव द्वारा बनाए गए जलाशय हैं, जो सिंचाई, जलापूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए बनाए जाते हैं। तमिलनाडु की भवानीसागर झील, राजस्थान की फतेहसागर झील और मध्य प्रदेश की गांधी सागर झील इसके उदाहरण हैं।

यह झीलें स्थानीय अर्थव्यवस्था और कृषि को समर्थन देती हैं। तेलंगाना की हुसैन सागर झील, जो हैदराबाद में है, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व रखती है। हालांकि, प्रदूषण और अतिक्रमण इन झीलों के लिए चुनौती हैं।

7. लैगून झीले (Lagoon Lakes):-

लैगून झीलों का निर्माण समुद्र-तट के किनारे बालू जमा होने के कारण होता है। उड़ीसा की चिल्का झील, पुलीकट (आंध्र प्रदेश), वेम्बनाद तथा अष्टामुदी-केरल के कयाल लैगून के कुछ उदाहरण हैं।

8. भूस्खलन झीलें (Landslide Lakes) :-

भूस्खलन झीलें तब बनती हैं, जब भूस्खलन या मलबा नदी के प्रवाह को अवरुद्ध करता है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ऐसी झीलें आम हैं। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड की गोविंद सागर झील भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्र में बनी है। ये झीलें अस्थायी हो सकती हैं और बाढ़ का खतरा पैदा करती हैं। इनका प्रबंधन और निगरानी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन और भूकंपीय गतिविधियां इन्हें अस्थिर बना सकती हैं।

द्रवण झीलें (Dissolution Lakes ):-

इन झीलों निर्माण सतह में एक गर्त के कारण होता है, जो चूना पत्थर तथा जिप्सम जैसे घुलनशील शैल के भूमिगत विलयन के कारण बनता है। ऐसे झीलें चेरापूंजी में तथा उसके आस-पास, शिलाँग (मेघालय), भीमताल, कुमाऊं तथा गढ़वाल (उत्तराखण्ड) में पायी जाती हैं।

भारत की झीलें प्रकृति और मानव गतिविधियों की विविधता का प्रतीक हैं। विवर्तनिक और हिमनदीय झीलें हिमालय के सौंदर्य को दर्शाती हैं, तो तटीय और गोखुर झीलें मैदानी और तटीय क्षेत्रों की जैव विविधता को समृद्ध करती हैं। कृत्रिम और क्रेटर झीलें मानव और भूवैज्ञानिक इतिहास को दर्शाती हैं। 

प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और अतिक्रमण इन झीलों के लिए खतरा हैं। इनके संरक्षण के लिए सामुदायिक प्रयास, नीतिगत हस्तक्षेप और जागरूकता आवश्यक है। ये झीलें भारत की प्राकृतिक धरोहर हैं, जिन्हें सहेजना हमारा कर्तव्य है।

प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ| गोदावरी| कृष्णा| कावेरी|महानदी

प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ मुख्य रूप से दक्कन के पठार और प्रायद्वीपीय क्षेत्र से निकलती हैं और अपनी उत्पत्ति, प्रवाह और विशेषताओं के आधार पर दो श्रेणियों में बाँटी जा सकती हैं:-

1- पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ
2- पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ।
ये नदियाँ प्रायद्वीपीय भारत के भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नीचे प्रमुख नदियों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है :-

1- पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ :-

ये नदियाँ पश्चिमी घाट से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। ये सामान्यतः लंबी होती हैं और बड़े डेल्टा का निर्माण करती हैं। प्रमुख नदियाँ हैं:-

और पढ़े :-सिंधु नदी तंत्र| झेलम(वितस्ता)| चेनाब (अस्किनी)| रावी

* गोदावरी नदी :-

उत्पत्ति – त्र्यंबकेश्वर, महाराष्ट्र (पश्चिमी घाट)।
लंबाई लगभग 1,465 किमी (भारत की दूसरी सबसे लंबी नदी)।
प्रवाह– महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा से होकर बंगाल की खाड़ी में।
विशेषता– यह दक्कन की सबसे बड़ी नदी है और इसका विशाल डेल्टा आंध्र प्रदेश में कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रमुख सहायक नदियाँ – प्राणहिता, मंजीरा, इंद्रावती, सबरी।

* कृष्णा नदी :-

उत्पत्ति– महाबलेश्वर, महाराष्ट्र (पश्चिमी घाट)।
लंबाई– लगभग 1,400 किमी।
प्रवाह– महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर बंगाल की खाड़ी में।
विशेषता– इसका डेल्टा उपजाऊ है और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रमुख सहायक नदियाँ– तुंगभद्रा, भीमा, कोयना, घाटप्रभा।

* कावेरी:-

उत्पत्ति– तलकावेरी, कर्नाटक (पश्चिमी घाट)।
लंबाई– लगभग 805 किमी।
प्रवाह– कर्नाटक और तमिलनाडु से होकर बंगाल की खाड़ी में।
विशेषता– इसे “दक्षिण की गंगा” कहा जाता है। इसका डेल्टा तमिलनाडु में धान की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
प्रमुख सहायक नदियाँ– हेमावती, कबिनी, अर्कावती, भवानी।

•महानदी :-

उत्पत्ति– सिहावा, छत्तीसगढ़।
लंबाई– लगभग 858 किमी।
प्रवाह– छत्तीसगढ़ और ओडिशा से होकर बंगाल की खाड़ी में।
विशेषता:- इसका डेल्टा ओडिशा में कृषि और बाढ़ नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रमुख सहायक नदियाँ– शिवनाथ, तेल, हसदेव।

•पेन्नार नदी:-

उत्पत्ति– नंदी पहाड़ियाँ, कर्नाटक।
लंबाई– लगभग 597 किमी।
प्रवाह– कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से होकर बंगाल की खाड़ी में।
विशेषता– यह छोटी नदी है, लेकिन इसका डेल्टा कृषि के लिए उपयोगी है।

स्वर्णरेखा नदी :-

उत्पत्ति– रानीचुआ पहाड़ी (छोटा नागपुर पठार) नागड़ी गांव के पास जिला रांची (झारखंड)
लंबाई– 400 किलोमीटर
प्रवाह– झारखंड (रांची, सरायकेला, खरसावां, पूर्वी सिंह भूमि)
ओडीशा (मयूरभंज, बालासोर) पश्चिम बंगाल- मेदिनीपुर
विशेषता– औद्योगिक नगर जमशेदपुर इसी नदी के किनारे स्थित है।
इसके किनारे तांबा और यूरेनियम का खनन होता है।
प्रमुख सहायक नदियां– खरकई, रारू, कांची, अंजी, करकरी

2. पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ :-

ये नदियाँ पश्चिमी घाट से निकलकर अरब सागर में गिरती हैं। ये सामान्यतः छोटी, तेज बहाव वाली और खड़ी ढलानों पर बहने वाली होती हैं। प्रमुख नदियाँ हैं:

नर्मदा नदी :-

उत्पत्ति– अमरकंटक, मध्य प्रदेश।
लंबाई– लगभग 1,312 किमी।
प्रवाह– मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर अरब सागर में।
विशेषता– यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी पश्चिमी बहाव वाली नदी है। यह रिफ्ट घाटी में बहती है और इसका मुहाना (एस्चुरी) गुजरात में है।
प्रमुख सहायक नदियाँ– होशंगाबाद, तवा, बरना।

•ताप्ती नदी :-

उत्पत्ति– मुलताई, मध्य प्रदेश।
लंबाई– लगभग 724 किमी।
प्रवाह– मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर अरब सागर में।
विशेषता– यह नर्मदा के समानांतर बहती है और इसका मुहाना भी गुजरात में है।
प्रमुख सहायक नदियाँ– पूर्णा, गिरना, पांझरा।

माही नदी :-

उत्पत्ति– मध्य प्रदेश (विंध्याचल पर्वत)।
लंबाई– लगभग 583 किमी।
प्रवाह– मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से होकर अरब सागर में।
विशेषता– यह गुजरात में कृषि और जलविद्युत के लिए महत्वपूर्ण है।

•साबरमती :-

उत्पत्ति– अरावली पर्वतमाला, राजस्थान।
लंबाई– लगभग 371 किमी।
प्रवाह– राजस्थान और गुजरात से होकर अरब सागर में।
विशेषता– अहमदाबाद शहर इसके किनारे बसा है।

लूनी नदी :-

उत्पत्ति– राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित नाग पहाड़ (अरावली श्रेणी) से।
लंबाई– 495 किलोमीटर
प्रवाह– अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर और जालौर कच्छ के रण (गुजरात)।
विशेषता– इस नदी को “आधी मीठी, आधी खारी” नदी भी कहते हैं, क्योंकि उद्गम स्थल से बालोतरा (बाड़मेर) तक इसका पानी मीठा होता है, तथा इससे आगे रेगिस्तान में इसका पानी खारा हो जाता है। यह मौसमी नदी है, तथा कच्छ के रण (गुजरात) में विलीन हो जाती है। प्रमुख सहायक नदियां- लीलड़ी, बाड़ी, सुकड़ी, मीठड़ी, जवाई, खारी और जोजरी, सागाई और गुहिया।
इस नदी को लवण्वती, मरू गंगा, रेगिस्तान की गंगा आदि नाम से भी जाना जाता है।

 बनास नदी :-

उत्पत्ति– खमनोर पहाड़ (Khamnor Hills)अरावली पर्वत श्रेणी, जिला राजसमंद (राजस्थान)।
लंबाई– 512 किलोमीटर
प्रवाह– राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर तथा टोंक जिलों से बहती है। विशेषता- इसका उद्गम स्थल वन क्षेत्र होने के कारण इसे “वन की नदी” कहा जाता है। यह नदी मुख्यतः राजस्थान में बहती है। यह चंबल नदी में मिल जाती है, जो यमुना की सहायक नदी है। प्रमुख सहायक नदियां- बेड़च, कोठारी, मोरेर, मेन्ल,खारी,दई, गंभीरी आदि।

शरावती नदी :-

उत्पत्ति– कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिले की अंबुथीर्था (Ambutirtha) पहाड़ी जो पश्चिमी घाट में स्थित है।
लंबाई– 128 किलोमीटर
प्रवाह– शिमोगा जिले से चलकर उत्तर कन्नड़ जिले के होनावर के समीप अरब सागर में गिरती है। विशेषता- यह एक बारहमासी नदी है।
यह नदी अपनी प्राकृतिक सुंदरता तथा विश्व प्रसिद्ध जोग जलप्रपात (Jog Falls) के लिए प्रसिद्ध है।

प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ  की विशेषताएँ और महत्व :-

भौगोलिक प्रभाव- प्रायद्वीपीय नदियाँ कठोर चट्टानी भूभाग से होकर बहती हैं, जिसके कारण इनमें जलप्रपात और घाटियाँ आम हैं। उदाहरण: कावेरी का होगेनक्कल जलप्रपात।
कृषि और अर्थव्यवस्था- पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ अपने डेल्टा क्षेत्रों में धान, गन्ना और अन्य फसलों के लिए उपजाऊ भूमि प्रदान करती हैं। पश्चिमी नदियाँ जलविद्युत और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सांस्कृतिक महत्व- कावेरी, गोदावरी और नर्मदा जैसी नदियाँ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से पवित्र मानी जाती हैं।

– प्रायद्वीपीय नदियाँ हिमालयी नदियों (जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र) की तुलना में छोटी और मौसमी होती हैं, क्योंकि ये मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर हैं।
– इन नदियों पर कई बाँध और जलाशय बनाए गए हैं, जैसे गोदावरी पर जायकवाड़ी बाँध और कृष्णा पर नागार्जुन सागर बाँध, जो सिंचाई और बिजली उत्पादन में सहायक हैं।