नूरजहाँ(NUR JAHAN) 31 मई 1577| एक महान शासिका

 

नूरजहाँ के पिता मिर्जा ग्यास बेग जो तेहरान के निवासी और तातार सुल्तान, खोरासान के बेलगार बेगी के बजीर ख्वाजा मोहम्मद शरीफ का पुत्र था । 

मिर्जा ग्यास बेग के समक्ष विषम परिस्थितियों के कारण यह अपना भाग्य आजमाने के लिए भारत आने के लिए विवश हुआ |

मलिक मसूद जो कि धनी व्यापारी था उसके संरक्षण में भारत की यात्रा पर निकलाजब यह कन्धार पहुँचा तो इसकी पत्नी ने एक पुत्री को  जन्म दिया। 

नूरजहाँ

और पढ़े :-अकबर (1542-1605) AKBAR THE GREAT से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत मे मालिक मसूद द्वारा अकबर के समक्ष ग्यास बेग का परिचय एक ईमानदार और परिश्रमी व्यक्ति रूप में कराया गया और इसी व्यक्तित्व के कारण बेग काबुल के दीवान के उच्च पद पर आसीन हुआ |
  • 17 वर्ष की आयु मे मेहरुन्निसा का विवाह फारस के एक साहसी युवक अली कुली बेग इस्तगलू दिया गयाजिसे बंगाल में एक जागीर और शेर अफगन की उपाधि से नवाजा गया |
  • शेर अफगन के विद्रोही हो जाने के कारण जहाँगीर द्वारा बंगाल के नये राज्यपाल कुतुबुद्दीन को इसे अपने अधीनस्थ करने के लिए भेजा गया |
  • इस अभियान में कुतुबुद्दीन शेर अफगन के हाथो मारा गया तथा स्वयं शेअफगन  कुतुबुदीन के अंगरक्षको द्वारा मारा गया। 
  • शेर अफगन की विधवा मेहरुन्निसा को 1607 ई. मे आगरा लाया गया और इसे सुल्ताना सलीमा बेगम के संरक्षण मे छोड़ दिया गया । 
  • 1611 ई.मे जहाँगीर ने मेहरुन्निसा से विवाह कर उसे नूर महल की उपाधि प्रदान  की जो कालांतर मे नूरजहाँ अर्थात संसार का प्रकाश में बदल दी गई। 
  • 1613 ई. में नूरजहाँ को पट्टमहिषी अथवा बादशाह बेगम कहा गया
  • नूरजहाँ द्वारा विवाह के बाद “नूरजहाँ गुट’ बनाया गया। 

नूरजहाँ का चरित्र:- 

  • विवाह के समय जहाँगीर की आयु 42 वर्ष तथा नूरजहाँ की आयु 34 वर्ष थी। 
  • नूरजहाँ एक सुन्दर शिक्षित तथा तीक्ष्ण बुद्धि वाली महिला थी |
  • जिसे कविता संगीत और चित्रकला का शौक था। 
  • नूरजहाँ द्वारा कविताएं लिखना, पुस्तकालय निर्माण वस्त्र, श्रृंगार और आभूषणों आदि के नयेनये डिजाइन बनवाना । 
  • जहांगीर से विवाह के समय नूरजहाँ द्वारा पहनी गयी नूरमहली’ पोशाक हरम की महिलाओं में लोकप्रिय रही। 
  • नूरजहाँ एक धैर्यवान और साहसी महिला थी इसे शासन में रुचि समस्याओं को हल करने की धार्मिक, सदाचारी कुशलता, चरित्रवान, निर्धनो की सहायता, करुणा, उदारता, आदि गुणो से परिपूर्ण थी। 
  • शासन में रुचि होने के कारण नूरजहाँ द्वारा शासन मे हस्तक्षेप किया गया जिससे सत्ता अपने हाथ मे रखने का प्रयास किया गया। 

नूरजहाँ का राजनीति और इतिहास पर प्रभाव :- 

  • जहांगीर से विवाह के बाद नूरजहाँ इसकी प्रमुख बेगम बन गई फलस्वरूप इसके द्वारा अपने पिता मिर्जा गियास बेग ( जिसे बाद मे एत्मादुद्दौला की उपाधि मिली) भाई आसफखाँ अन्य रिश्तेदारों को उच्च पद प्रदान किए गए। 
  • नूरजहाँ की स्वीकृति लेने के बाद ही उस समय किसी भी महिला को भूमि दान में दी जा सकती थी
  • नूरजहाँ के द्वारा  जहांगीर के साथ झरोखा दर्शन में प्रतिभाग करनासिक्कों पर नाम लिखा जाना, आदेश पत्रो पर बादशाह के हस्ताक्षरों के  साथ साथ नूरजहाँ का नाम लिखना, आदि शासन में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय की स्वीकृति बिना नूरजहाँ की स्वीकृति के सम्भव थी अर्थात सत्ता नूरजहाँ के हाथो मे चली गई थी । 
  • नूरजहाँ द्वारा विवाह के कुछ ही वर्षो बाद नूरजहाँ गुट बनाया गया जिसमें नूरजहाँ, एत्मादुद्दौला (पिता) अस्मत बेगम (माँ) आसफ खाँ (भाई) तथा शाहजादा खुर्रम शामिल थे। 
  • शाहजादा खुर्रम (शाहजहाँ) का विवाह नूरजहाँ द्वारा अपने भाई आसफखां  की पुत्री अर्जुमन्द बानू बेगम से किया गया। 
  • 1621 मे लाडली बेगम (शेर अफगन नूरजहाँ की पुत्री) का विवाह शाहजादा शहरयार से कर दिया गया। 
  • नूरजहाँ का मानना था कि शाहजहाँ एक अहंवादी व्यक्ति है- जो सत्ता का बंटबारा नही चाहेगा, इसलिए वह शाहजादा शहरयार को बादशाह बनाने के पक्ष मे थी
  • शहरयार एक दुर्बल चरित्र अल्पायु होने के कारण सत्ता नूरजहाँ के हाथों मे रह सकती थी। 
  • 1626 ई. में महाबत खाँ ने विद्रोह किया और उसने बादशाह जहाँगीर को व्यक्तिगत रूप से बन्दी बनाकर नूरजहाँ के प्रभाव को समाप्त करने का प्रयत्न  किया । 
  • शाहजहाँ के द्वारा किये गए  विद्रोह का  कारण नूरजहाँ की सत्ता प्रियता थीं। 

Leave a Comment