मोहनजोदड़ो | हड़प्पा सभ्यता | सिन्धु सभ्यता

 

सिन्धु सभ्यता का सबसे उपयुक्त नाम हड़प्पा सभ्यता है क्योंकि सबसे पहले हड़प्पा स्थल ही खोजा गया थासन् 1921 में दयाराम साहनी को सिन्धु सभ्यता की खोज का श्रेय दिया जाता हैइस सभ्यता का काल हाल के शोधों के आधार पर 3500 ई.पू. माना जाता है जबकि उत्खनन के आधार पर इसकी तिथि 2500 ई.पू. निर्धारित की गई है फिर भी इसकी तिथि सर्वमान्य रूप से 2350 से 1750 ई.पू. निर्धारित की गई है। 

सिन्धु सभ्यता को प्रथम नगरीय क्रान्ति कहा जाता है सिन्धु सभ्यता के अवशेष जहाँ कहीं भी मिले वे अत्यंत विकसित अवस्था में मिले अतः इसके आदि और अंत का पता एक यक्ष प्रश्न की भाँति बना है |

हड़प्पा सभ्यता एक बृहत त्रिभुजाकार रूप में विकसित थी। इस सभ्यता का- 

  • सबसे पूर्वी किनारा – आलमगीरपुर (यू.पी.),  हिंडन नदी के किनारे                                            
  • पश्चिमी किनारा – सुत्कारोंडोर (पाकिस्तान), दाश्क नदी के किनारे                                                
  •  उत्तरी किनारा – माण्डा (जम्मू कश्मीर), चिनाव नदी के किनारे                                                         
  •  दक्षिणी किनारा – दैमाबाद (महाराष्ट्र),  गोदावरी नदी के किनारे 

हड़प्पा सभ्यता

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हड़प्पा सभ्यता से सम्बद्ध प्रमुख नगर निम्नलिखित हैं- 

1- हड़प्पा :-

(मान्टगोमरी जिला (आधुनिक शाहिवाल )पाकिस्तान, रावी नदी के किनारे बांयें तट पर)

  • सर्वप्रथम उल्लेख – चार्ल्स मेसन
  • खोजकर्ता – दयाराम साहनी (जान मार्शल के निर्देशन पर)
  • वर्ष – सन् 1921 ई

. हड़प्पा सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता / सैंधव सभ्यता :-

  • क्षेत्रफल की दृष्टि से यह सिंधु सभ्यता का दूसरा सबसे बड़ा स्थल हैइसके दुर्ग टीले को AB नाम दिया गया हैदुर्ग के बाहर 6 मीटर ऊंचे टीले को 7 नाम दिया गया हैइसी टीले पर अन्नागार, अनाज कूटने के वृत्ताकार चबूतरे और श्रमिक आवास के साक्ष्य मिले हैं। 
  • एक कब्रिस्तान हड़प्पा नगर दक्षिणी दिशा में मिलता है जिसे समाधि R-37 नाम दिया गया । 
  • यहाँ पर 6-6 की दो पंक्तियों में निर्मित कुल 12 कक्षों वाले एक अन्नागार का अवशेष प्राप्त हुआ। 
  • हड़प्पा का नगर लगभग 5 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्र में विस्तृत है जिनमें मुख्यतया दो टीले पूर्व तथा पश्चिम मिलते हैंपूर्वी टीले पर नगर जबकि पश्चिमी टीले पर दुर्ग निर्मित था । 
  • सिन्धु सभ्यता की अभिलेख युक्त मोहरें सबसे अधिक हड़प्पा सभ्यता से ही प्राप्त हुई हैं। 

चन्हूदड़ो:-

स्थिति सिन्ध प्रान्त, पाकिस्तान, (सिन्धु नदी के बायें तट पर        खोजकर्त्ता एन. जी. मजूमदार (सन् 1931 ई.) 

साक्ष्य जो प्राप्त हुये – 

  • मनके बनाने का कारखाना । 
  • एक ऐसी मुद्रा जिस पर तीन घड़ियाल और दो मछलियों की आकृतियाँ हैंवक्राकार ईंटें । 
  • लिपिस्टिक, काजल, कंघा, उस्तरा आदि । 
  • चन्हूदड़ों में सिंधु संस्कृति के बाद झूकर संस्कृति तथा झांगर संस्कृति विकसित हुई।
  • चन्हूदड़ो एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ पर मिट्टी की पकी हुई पाइपनुमा नालियों का प्रयोग किया गया। 
  • यहाँ प्राक् हड़प्पा संस्कृति जिसे झूकर संस्कृति तथा भाँगर संस्कृति कहते हैं, का भी अवशेष प्राप्त हुआ है। 

लोथल नगर :-

  • स्थिति अहमदाबाद, गुजरात, भोगवा नदी के किनारे                   
  •  खोजकर्त्ता एस. आर. राव                                             
  •  वर्ष – सन् 1954 
  •  इसे लघु हड़प्पा या लघु मोहन जोदड़ो भी कहा जाता है|
  • इसका अर्थ मृतकों का टीला है । 
  • लोथल में भी पकी ईंटों से बना एक विशाल आकार का स्थापत्य प्राप्त हुआ है जिसे एस. आर. राव ने बन्दरगाह / गोदीवाड़ा (डाकमार्क) बताया हैयह एक नहर द्वारा भोगवा नदी से सम्बद्ध थाइस प्रकार यह गोदीवाड़ा के साक्ष्य वाला प्राचीनतम स्थल है। 
  • इस नगर की जल प्रबंधन व्यवस्था सबसे उत्तम थी। 
  • चन्हूदड़ो की भाँति लोथल से भी भनके बनाने का कारखाना प्राप्त हुआ हैलोथल में भाण्डागार के भी साक्ष्य मिले हैं। 
  • यह हड़प्पा कालीन सभ्यता का एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र था । 

(2) मोहनजोदड़ो :-

  • स्थित – लरकाना जिला, पाकिस्तान, सिन्धु नदी के दाहिने तट पर    
  • खोजकर्त्ता – रखाल दास बनर्जी 
  •  वर्ष – सन् 1922 ई. 
  •  इसे मृतकों का टीला या नखलिस्तान या  सिन्धु का बाग कहा जाता है
  •  यह सैन्धव सभ्यता का सबसे बड़ा नगर था जिसकी जनसंख्या सबसे अधिक थी। 
  • यह नगर भी पूर्व तथा पश्चिम दो भागों में विभक्त था । 
  • मोहनजोदड़ो का तात्पर्य हैप्रेतों का टीला ” | मोहनजोदड़ो का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थल विशाल स्नानागार है जबकि सबसे बड़ी इमारत अन्नागार या अन्नकोठार है|
  • यहाँ से एक विशाल भवन मिला है जिसे पुरोहित आवास कहा गया हैयहाँ से मिली नर्तकी की कांसे की मूर्ति विशेष उल्लेखनीय है । 
  • मोहनजोदड़ो का नगर नियोजन “ग्रिड प्रणाली” पर आधारित था। 
  • बृहत् स्नानागार सामान्य जनता के लिये था और इसका प्रयोग धार्मिक अनुष्ठान संबंधी स्नान के लिये किया जाता थाइसे जान मार्शल ने तत्कालीन विश्व का आश्चर्यजनक निर्माण बताया है। 

जुड़वां राजधानियाँ  

हड़प्पा और मोहनजोदड़ो एक दूसरे से 482 किलोमीटर दूर सिन्धु नदी द्वारा जुड़े थेस्टुअर्ट विग्गर महोदय ने इन दोनों नगरों को सिन्धु सभ्यता की जुड़वाँ राजधानियाँ कहा है । 

कालीबंगा :-

  • स्थिति राजस्थान, सरस्वती नदी / घग्घर नदी के तट पर 
  • खोजकर्त्ता – अमलानन्द घोष 
  • वर्ष –  सन् 1951 ई.
  • कालीबंगा का तात्पर्य है “काले रंग की चूड़ियाँ । 
  •  यहाँ जुते हुये खेत के साक्ष्य मिलते हैं यहाँ खेतों में चना और सरसों को एक साथ बोये जाने का संकेत मिलता है। 
  • यहाँ से भूकम्प के प्राचीनतम साक्ष्य मिलते हैं 
  • कालीबंगा के दुर्गटीले के दक्षिणी भाग में मिट्टी और कच्ची ईंटों के बने हये 5-6 चबूतरे मिले हैं जिनके ऊपर कई अग्निकुण्ड या आयताकार वेदिकायें बनी हैं। 
  • यहाँ से अण्डाकार कब्रें एक युगल शवाधान के भी साक्ष्य मिले हैं।         
  • यहाँ एक बच्चे की खोपड़ी में 6 छिद्र किये जाने का प्रमाण मिला है। इसे शल्य क्रिया का प्राचीनतम उदाहरण माना जाता है। 
  • कालीबंगा के मकान कच्ची ईंटों के बने हैंनगर टीलों से अलंकृत ईंटों के प्रयोग के प्रमाण मिले हैं। 
  • कालीबंगा में जल निकास प्रणाली का अभाव था यहाँ पर निर्मित अग्नि- कुण्ड से पशुओं और हिरणों की हड्डियाँ प्राप्त हुई हैं जिससे यहाँ पशुबलि दिये जाने के संकेत मिलते हैं। 

धौलावीरा :-

  • स्थिति – कच्छ, गुजरात 
  • खोजकर्त्ता जे. पी. जोशी (सन 1967-69 ई.)                         
  • साक्ष्य – एक पुराना कुआँ 
  • हड़प्पा सभ्यता का एकमात्र स्टेडियम (क्रीड़ागार), नेवले की पत्त्थर की मूर्ति, विशाल जलाशय (सबसे आश्चर्यजनक), पालिशदार श्वेत पाषाण खण्ड बड़ी संख्या में प्राप्त हुये हैं 
  • यह भारत में स्थित सिन्धु सभ्यता का दूसरा सबसे बड़ा नगर हैजबकि भारत में स्थित सबसे बड़ा नगर है। 
  • यहाँ के उत्खनन से हड़प्पा संस्कृति के तीन चरणों का पता चला है। 

 बनवाली :-

  • स्थिति – हिसार, हरियाणा 
  • खोजकर्त्ता – आर. एस. बिष्ट 
  • वर्ष – सन् 1974 ई. 
  • यहाँ से भी कई मकानों से अग्निवेदियाँ मिली हैं। बनवाली में सिन्धु सभ्यता की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता जल-निकास प्रणाली का अभाव था। यहाँ से प्राक् हड़प्पा, हड़प्पा एवं हड़प्पोत्तर काल के प्रमाण प्राप्त हुये हैं । 

राखीगढ़ी :-

  • स्थिति हरियाणा के जीन्द जिले में अवस्थित । 
  • भारत में सैन्धव सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल हैइसकी खोज सूरज भानु द्वारा की गईयह घग्घर नदी के तट पर स्थित है। 

रोपड़ :-                                                                                 

  •  पंजाब प्रान्त में रोपड़ सतलुज नदी के बायें तट पर स्थित है। 
  • यहाँ के एक कब्रिस्तान से मनुष्य के साथ पालतू कुत्ते को दफनाये जाने का साक्ष्य मिला है। 
  • हरियाणा के हिसार जिले में स्थित कुणाल से चाँदी के दो मुकुट प्राप्त हुये हैं
  • गुजरात के कच्छ के रण में अवस्थित सुरकोटदा के खोजकर्ता जगपति जोशी हैंयहाँ से घोड़े की अस्थियाँ प्राप्त हुई हैं । 
  •  पाकिस्तान में अवस्थित अल्लाहदीनों एक बन्दरगाह नगर था। 
  • आलमगीरपुर . प्र. के मेरठ जिले में हिण्डन नदी के किनारे अवस्थित है इसकी खोज यज्ञदत्त शर्मा द्वारा की गई। 
  • कुन्तासी गुजरात के राजकोट जिले में अवस्थित हैयह एक बन्दरगाह नगर था । 

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