अमीर खुसरो (amir khusro) भारतीय संस्कृति और संगीत के अमर संवाहक

निःसंदेह भारतीय कवियों में बहुत उच्च स्थान अमीर खुसरो(amir khusro) को प्राप्त है| अमीर खुसरो जिसका लोकप्रिय नाम “तूती-ए-हिन्द” था। इनका जन्म 1253 ई० में पटियाला(उ०प्र० के एटा जिले में स्थित) में हुआ था।खुसरो के पिता एक तुर्की शरणार्थी थे।

amir khusro

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बलबन के पुत्र राजकुमार महमूद खाँ के समय में अमीर खुसरो(amir khusro) ने स्वयं कवि का पद ग्रहण किया और उसकी मृत्यु के बाद बलबन से लेकर गयासुद्दीन तुगलक तक अमीर खुसरो ने आठ सुल्तानों का शासन देखा था प्रारम्भ में वह बलबन के सबसे बड़े पुत्र मुहम्मद की सेवा में रहा। इसके पश्चात् वह कैकूबाद, क्यूमर्स, अलाउद्दीन खिलजी, जलालुद्दीन खिलजी, मुबारक खिलजी, खुसरवशाह तथा गयासुद्दीन तुगलक तक के शासन काल को अपने आँखों से देखा तथा इनकी सेवा में रहा। सभी सुल्तानों का संरक्षण प्राप्त करता रहा।

अपने जीवन के अन्तिम दिनों में उसने संसार छोड़ दिया और शेख निजामुद्दीन औलिया का शिष्य हो गया। अमीर खुसरो (amir khusro)ने बहुत कुछ लिखा है। कहा जाता है कि उसने 4 लाख से अधिक पद लिखे थे।

अमीर खुसरो (amir khusro) पहला मुस्लिम कवि है जिसने हिन्दी शब्दों का प्रयोग किया और जिसने भारतीय काव्य-परम्परा को ग्रहण किया। उसकी महत्त्वपूर्ण रचनाओं में तुगलकनामा, खजियन-उल-फतूह और तारीख-ए-अलाई आते हैं।

अमीर खुसरो अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण अभियान के समय उसके साथ गया था। निजामुद्दीन औलिया ने अमीर खुसरो (amir khusro) को तुर्कल्लाह की उपाधि दी थी। इसकी मृत्यु 1325 ई० में निजामुद्दीन औलिया के मृत्यु के दूसरे दिन गयासुद्दीन तुगलक के समय में हुई।

 सर्वप्रथम अमीर खुसरो ने अपनी फारसी रचनाओं में भारतीय मुहावरों एवं प्रचलित शब्दों का प्रयोग कर उसे भारतीय पर्यावरण के अनुसार ढालने का सफल प्रयास किया।

अमीर खुसरो (amir khusro)पहला व्यक्ति था| जिसने हिन्दी, हिन्दवी और फारसी में एक साथ लिखा। अमीर खुसरो (amir khusro) को खड़ी बोली के आविष्कार का श्रेय दिया जाता है।

खुसरो की हिन्दवी रचनाओं की भाषा ठेठ खड़ी बोली तथा ब्रज है। उसने ठेठ खड़ी बोली का प्रयोग पहेलियों, मुकरियों आदि के रूप में किया है।

अमीर खुसरो (amir khusro)फारसी कविता का भारतीयकरण करने वाला प्रथम कवि था। यह भारत की तुलना स्वर्ग के उद्यानों से करता है। वह कहता है कि “मैं भारतीय तुर्क हूँ और तुम्हें हिन्दवी में उत्तर दे सकता हूँ। अरबी की बात करने के लिए मेरे पास मिश्री-शक्कर नहीं है।”

साहित्य के अतिरिक्त संगीत के क्षेत्र में भी अमीर खुसरो का महत्वपूर्ण योगदान है। उसने भारतीय और पारशियन (ईरानी) रागों का सुन्दर मिश्रण किया और एक नवीन रागशैली इमान, जिल्फ, साजगरी आदि को जन्म दिया।

उसने फारसी-अरबी मूल के कई राग जैसे-एमन व घोर आदि भारतीय संगीत में शामिल किया तथा भारतीय कव्वाली में एक नवीन शैली को जोड़ा।

अमीर खुसरो ने अनेक काव्यात्मक शैलियों में हिन्दी का प्रयोग किया और फारसी की एक नयी शैली सृष्टि की, जो सबक-ए-हिन्दी अर्थात् हिन्दुस्तानी की शैली के नाम से प्रसिद्ध हुई।

भारत की तत्कालीन समाज पर दृष्टि डालते हुए- सल्तनत काल में गरीब व असहाय किसानों के बारे में अमीर खुसरो ने लिखा है कि- “राजकीय मुकुट का प्रत्येक मोती गरीब किसान की अश्रुपूरित आँखों से गिरी हुई रक्त की घनीभूत बूंद है।” अमीर खुसरो की इस कथन को मोरलैण्ड ने अपनी पुस्तक में उद्धृत किया है।

प्रसिद्ध रचनाएं:-           

अमीर खुसरो की प्रसिद्ध रचनाएं इस प्रकार हैं:- 

amir khusro

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किरान-उस सदायम(Qiran-us-Sadain):-

 अमीर खुसरो(amir khusro)की यह पहली मसनवी है जो 1289 ई० में लिखी गयी इस किताब  में बुगरा खाँ व उसके बेटे कैकूबाद के मिलन का वर्णन है। इसमें दिल्ली, उसकी इमारतों, शाही दरबार, अमीरों व अधिकारियों के सामाजिक जीवन के बारे में वर्णन है।

मिफ्ता उल-फुतुह (miftah-ul-futuh):-

इसकी रचना 1291 ई० में जलालुद्दीन खिलजी के संरक्षण में हुई । इसमें जलालुद्दीन खिलजी के सैन्य अभियानों, मलिक छज्जू का विद्रोह व उसका दमन, रणथम्भौर पर सुल्तान की चढ़ाई और झायन की विजय का वर्णन है।

खजाइनुल फुतुह(khazain-ul-futuh):-

इस किताब को तारीख-ए-अलाई भी कहा जाता है। इस किताब में  अलाउद्दीन खिलजी के शासन काल के प्रथम सोलह वर्षों तक की घटनाओं तथा अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण भारत के सैनिक अभियानों व उसके गुजरात, चित्तौड़, मालवा तथा वारंगल की विजयों का उल्लेख है।अपनी रचना खजाइनुल-फुतुह में शतरंज के बारे में वर्णन किया और इसके अनुसार इस खेल का आविष्कार भारत में हुआ |

आशिका(ashiqah):-

इस किताब में गुजरात के राजा करन की पुत्री देवल रानी और अलाउद्दीन के पुत्र खिज्र खाँ की प्रेमगाथा का वर्णन है। इसमें  अलाउद्दीन खिलजी की गुजरात तथा मालवा विजय व मंगोलों द्वारा स्वयं अपने कैद किए जाने का वर्णन किया है। आशिका काव्य शैली में लिखित ग्रन्थ है। अमीर खुसरो ने इसे अलाउद्दीन खिलजी के पुत्र खिज्र खाँ के आदेश पर लिखा था।

नूह-सिपिहर(nuh sipihr):-

इस ग्रन्थ में खुसरो ने भारत की तुलना स्वर्ग के उद्यानों से की है।इसमें अलाउद्दीन खिलजी के पुत्र मुबारकशाह खिलजी का चाटुकारितापूर्वक वर्णन किया गया है। इस ग्रन्थ में अमीर खुसरो ने मुबारक खिलजी की विजयों के साथ-साथ भारत की जलवायु, पशु-पक्षियों तथा धार्मिक जीवन का रोचक विवरण दिया है। 

तुगलकनामा(tughlaq nama):-

काव्य शैली में लिखित अमीर खुसरो (amir khusro)की यह अन्तिम ऐतिहासिक मसनवी है। इसमें खुसरव शाह व गयासुद्दीन तुगलक के मध्य कुटनीति व युद्ध तथा गयासुद्दीन तुगलक द्वारा दिल्ली के सिंहासन को प्राप्त करने का विवरण है। 

एजाज-ए-खुसरवी(ejaz e khusrawi):-

इसमें धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन के बारे में विशेषकर सूफी मत से सम्बन्धित जानकारी मिलती है।

निस्सन्देह भारतीय कवियों में बहुत उच्च स्थान अमीर खुसरो(amir khusro) को प्राप्त है। उसने 4 लाख से अधिक पद लिखे थे। वही पहला मुस्लिम कवि है जिसने हिन्दी शब्दों का प्रयोग किया और जिसने भारतीय काव्य-परम्परा को ग्रहण किया। 

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